डुहा गांव में पारिवारिक विवाद बना हिंसा की वजह

नशे में चूर चाचा की दबंगई से खूनी बवाल, डुहा गांव में कुदाल से सिर पर वार, नाबालिग शामिल


बलिया (राष्ट्र की परम्परा)। बलिया जिले के सिकंदरपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत डुहा गांव में बुधवार तड़के एक घरेलू विवाद ने अचानक हिंसक और खूनी रूप ले लिया। नशे में धुत चाचा की कथित दबंगई, गाली-गलौज और उग्र व्यवहार ने पूरे परिवार को दहशत में डाल दिया। हालात इतने बिगड़ गए कि आत्मरक्षा में किए गए कुदाल के वार से एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया। इस घटना के बाद गांव में तनाव और भय का माहौल बना हुआ है।

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प्राप्त जानकारी के अनुसार, डुहा गांव निवासी अनिल कुमार प्रजापति (40 वर्ष), पुत्र रामकिशन प्रजापति, जो ऋषिकेश में राजमिस्त्री का कार्य करता है, दो दिन पहले ही अपने घर लौटा था। आरोप है कि बुधवार सुबह लगभग 3 बजे वह शराब के नशे में अपनी भाभी के दरवाजे पर पहुंचा और जोर-जोर से गाली-गलौज करने लगा। परिजनों ने उसे शांत कराने का प्रयास किया, लेकिन नशे में चूर अनिल और अधिक आक्रामक होता चला गया।
हंगामे की आवाज सुनकर परिवार के अन्य सदस्य भी जाग गए। इसी दौरान घर का 16 वर्षीय नाबालिग भतीजा बीच-बचाव के लिए आगे आया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विवाद बढ़ते-बढ़ते हाथापाई में बदल गया। हालात बेकाबू होते देख घबराए किशोर ने पास में रखी खेतिहर औजार कुदाल उठा ली और आत्मरक्षा में वार कर दिया।

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कुदाल का वार अनिल कुमार के सिर पर लगा, जिससे वह मौके पर ही लहूलुहान होकर गिर पड़ा। सिर में गंभीर चोट लगने के कारण काफी मात्रा में खून बहने लगा। घटना के बाद घर और गांव में अफरा-तफरी मच गई। आनन-फानन में परिजन और ग्रामीण घायल को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सिकंदरपुर ले गए, जहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद उसकी हालत गंभीर बताई। सिर में गहरी चोट होने के कारण उसे निगरानी में रखा गया है।
घटना को लेकर दोनों पक्षों की ओर से अलग-अलग दावे सामने आए हैं। घायल पक्ष का आरोप है कि नाबालिग और उसकी मां ने मिलकर जान से मारने की नीयत से हमला किया। वहीं दूसरे पक्ष का कहना है कि अनिल कुमार लगातार शराब के नशे में गाली-गलौज कर रहा था और परिवार की सुरक्षा के लिए आत्मरक्षा में यह कदम उठाना पड़ा।

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इस पूरे मामले में प्रभारी निरीक्षक सिकंदरपुर मूलचंद चौरसिया ने बताया कि घायल के मेडिकल परीक्षण के आधार पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस मामले की गहन जांच कर रही है। नाबालिग की संलिप्तता को देखते हुए किशोर न्याय अधिनियम के तहत आवश्यक विधिक प्रक्रिया अपनाई जा रही है। गांव में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस लगातार निगरानी कर रही है।
यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि नशा किस तरह पारिवारिक रिश्तों को तोड़कर हिंसा में बदल देता है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते नशे पर नियंत्रण और पारिवारिक विवादों का समाधान किया जाए, तो ऐसे हादसों से बचा जा सकता है।

Editor CP pandey

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