मवेशी खाना की भूमि पर अतिक्रमण: क्या प्रशासनिक इच्छाशक्ति की कमी?

पैमाइश के दो साल बाद भी मवेशी खाना की जमीन खाली क्यों नहीं? प्रशासनिक चुप्पी पर उठे सवाल


बलिया (राष्ट्र की परम्परा)।नरही थाना क्षेत्र के खमीरपुर चट्टी में सड़क से सटी अराजी संख्या 348, रकबा 65 एअर की जमीन—जो राजस्व अभिलेखों में पुलिस विभाग के नाम मवेशी खाना (जानवर जेल) के रूप में दर्ज है—आज भी अतिक्रमण की गिरफ्त में है। हैरानी की बात यह है कि दो साल पहले पैमाइश और सीमांकन की कार्रवाई पूरी होने के बावजूद जमीन खाली नहीं कराई जा सकी।

ये भी पढ़ें – किसानों और व्यापारियों के लिए जीवनरेखा बनी मझवारा सब्जी मंडी वर्षों से बंद

वर्ष 2024 में राजस्व विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर सीमांकन और पैमाइश की थी। अतिक्रमण पाए जाने पर कथित कब्जेदारों को नोटिस जारी किए गए थे और स्वयं अतिक्रमण हटाने की चेतावनी भी दी गई। उस समय उम्मीद जगी थी कि सरकारी जमीन को जल्द मुक्त कराया जाएगा, लेकिन नोटिस के बाद न तो प्रभावी कार्रवाई हुई और न ही बुलडोजर की आवाज सुनाई दी। इसके बाद पूरा मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
स्थानीय नागरिकों का सवाल सीधा है—जब जमीन पुलिस विभाग के मवेशी खाना के नाम दर्ज है और सार्वजनिक उपयोग के लिए आरक्षित है, तो उसे खाली कराने में देरी क्यों? क्या विभाग को इस जमीन की जरूरत नहीं, या फिर कानूनी पेच, स्थगन आदेश, अथवा प्रभावशाली दबाव के चलते कार्रवाई रुकी हुई है?

ये भी पढ़ें – डांट से नाराज़ भाई ने पार की हैवानियत की हद

ग्रामीणों के अनुसार, पैमाइश के दौरान भूमि की स्पष्ट नाप-जोख हुई थी। सीमांकन के खंभे भी लगाए गए थे। इसके बावजूद अतिक्रमण जस का तस बना हुआ है। इससे प्रशासनिक इच्छाशक्ति पर सवाल उठ रहे हैं। कुछ लोग तंज कसते हुए कहते हैं कि कहीं किसी “अदृश्य साए” के आगे कार्रवाई शिथिल तो नहीं पड़ गई।
प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि कई मामलों में आपत्तियां, अपील, या न्यायालयीय प्रक्रियाएं कार्रवाई को लंबा कर देती हैं। हालांकि, इस प्रकरण में अब तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, जिससे संदेह और गहराता जा रहा है। सरकारी जमीन पर अतिक्रमण केवल कानून-व्यवस्था का नहीं, बल्कि जनहित का मुद्दा है। मवेशी खाना (जानवर जेल) जैसी भूमि का उद्देश्य आवारा या जब्त पशुओं के रख-रखाव के साथ-साथ प्रशासनिक जरूरतों की पूर्ति करना होता है।

ये भी पढ़ें – ऊर्जा नीति और आयात शुल्क पर विपक्ष बनाम सरकार की सीधी टक्कर

यदि ऐसी जमीन वर्षों तक अतिक्रमित रहती है, तो इससे न केवल सरकारी योजनाओं में बाधा आती है, बल्कि आम जनता का प्रशासन पर भरोसा भी कमजोर होता है। स्थानीय नागरिकों ने जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक से मांग की है कि मामले की पुनः समीक्षा कर समयबद्ध कार्रवाई की जाए, ताकि सरकारी भूमि को मुक्त कराया जा सके और भविष्य में ऐसी लापरवाही न हो।
अब देखना यह है कि प्रशासन इस प्रश्न का उत्तर कब और किस रूप में देता है—क्या जमीन मुक्त होगी या सवाल यूं ही हवा में तैरते रहेंगे।

Editor CP pandey

Recent Posts

देवरिया में सनसनी: ओवरब्रिज पर महिला पर चाकू से ताबड़तोड़ हमला, राहगीरों ने बचाई जान

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। देवरिया शहर के मालवीय रोड ओवरब्रिज पर सोमवार को उस समय…

2 days ago

अमेरिकी हमले से भड़का ईरान, जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर दागीं बैलिस्टिक मिसाइलें

तेहरान/वॉशिंगटन (राष्ट्र की परम्परा)। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर…

2 days ago

अंकित बालियान हत्याकांड: 5 दिन बाद शामली पुलिस का बड़ा एक्शन, एनकाउंटर में सुमित और मोहित ढेर

शामली (राष्ट्र की परम्परा)। हरियाणवी गायक अंकित बालियान हत्याकांड में शामली पुलिस ने बड़ी कार्रवाई…

2 days ago

देवरिया की पूर्व DM दिव्या मित्तल का इस्तीफा, 13 साल की सेवा को कहा अलविदा

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। देवरिया की पूर्व जिलाधिकारी और 2013 बैच की आईएएस अधिकारी दिव्या…

3 days ago

पुलिस ने कांग्रेस प्रवक्ता को किया हाउस अरेस्ट, मुख्यमंत्री को ज्ञापन देने की थी तैयारी

बरहज/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। बरहज विधानसभा क्षेत्र के विकास, बदहाल मोहन सेतु, सोनूघाट से बरहज…

3 days ago