निजीकरण के लाभ संबंधी विज्ञापन से भड़के बिजलीकर्मी, 5 जुलाई को प्रांतव्यापी विरोध दिवस का ऐलान


संघर्ष समिति बोली- सरकार दे संवाद का अवसर, नहीं तो होगा बड़ा आंदोलन

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा) उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के पक्ष में “अब हर घर रोशन – उत्तर प्रदेश” शीर्षक से प्रकाशित पूरे पृष्ठ के विज्ञापन ने प्रदेश के बिजली कर्मचारियों, अभियंताओं और जूनियर इंजीनियरों को आक्रोशित कर दिया है। निजीकरण के खिलाफ पहले से लामबंद विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने अब 5 जुलाई को प्रांतव्यापी विरोध दिवस मनाने की घोषणा की है।

संघर्ष समिति के वरिष्ठ पदाधिकारियों — पुष्पेंद्र सिंह, दीपक श्रीवास्तव, सी.बी. चौरसिया, राघवेंद्र द्विवेदी, श्याम सिंह, एन.के. सिंह, प्रभुनाथ प्रसाद, संगमलाल मौर्य, इस्माइल खान, संदीप श्रीवास्तव सहित अन्य नेताओं ने विज्ञापन को “गुमराह करने वाला और तथ्यहीन” बताते हुए गहरी आपत्ति दर्ज की है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस विज्ञापन में निजीकरण को लाभकारी दर्शाकर प्रदेश की जनता को भ्रमित किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री से की संवाद की मांग

संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अपील की है कि निजीकरण पर अंतिम निर्णय लेने से पूर्व समिति को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाए। समिति का कहना है कि यदि मुख्यमंत्री को पूरे तथ्य बताए जाएं, तो वे “लाखों करोड़ की सार्वजनिक संपत्ति की लूट” को अनुमति नहीं देंगे।

“विज्ञापन में खुद विरोधाभास है”

संघर्ष समिति का आरोप है कि विज्ञापन में एक ओर 2012 से 2017 तक सुधार कार्यक्रम का हवाला दिया गया है, दूसरी ओर 2017 से अब तक की उपलब्धियां भी गिनाई गई हैं, जोकि सरकारी व्यवस्था में ही हासिल हुई हैं। ऐसे में यह सवाल उठता है कि जब सरकारी तंत्र ही सुधार ला रहा है, तो निजीकरण की आवश्यकता क्यों?

अविश्वसनीय प्रबंधन से निजीकरण की प्रक्रिया

समिति का कहना है कि जब सरकार खुद विज्ञापन में “विश्वसनीयता” की बात कर रही है, तो यह स्वीकारोक्ति है कि वर्तमान प्रबंधन पर भरोसा नहीं रहा। विडंबना यह है कि उसी अविश्वसनीय प्रबंधन के जरिए अब निजीकरण की प्रक्रिया चलाई जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार और पॉवर कारपोरेशन के कुछ उच्चाधिकारी निजी कंपनियों से मिलीभगत कर 42 जिलों की अरबों की परिसंपत्तियां कौड़ियों के दाम बेचने की साजिश में लिप्त हैं।

जनजागरण और विरोध की रणनीति

संघर्ष समिति ने कहा है कि 5 जुलाई को पूरे प्रदेश में सभी परियोजनाओं और विद्युत उपकेंद्रों पर विस्तृत विरोध सभाएं आयोजित होंगी। इन सभाओं में आम नागरिकों और किसानों को भी शामिल किया जाएगा ताकि उन्हें निजीकरण के दुष्परिणामों से अवगत कराया जा सके।

इसके साथ ही समिति द्वारा प्रत्येक जनपद में जेल भरो आंदोलन के लिए स्वैच्छिक रूप से तैयार कर्मचारियों की सूची भी तैयार की गई है, जिसे जल्द अंतिम रूप दिया जाएगा।

Editor CP pandey

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