कुशीनगर, (राष्ट्र की परम्परा)
जनपद कुशीनगर में वर्षों से बंद पड़ी पडरौना चीनी मिल को दोबारा चालू कराने की दिशा में प्रशासनिक स्तर पर पहल तेज हो गई है। गुरुवार को विकास भवन सभागार में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में आयोजित महत्वपूर्ण बैठक में मिल के पुनः संचालन, भूमि विवाद और किसानों के बकाया भुगतान जैसे अहम मुद्दों पर व्यापक चर्चा हुई।
बैठक की अध्यक्षता महेंद्र सिंह तंवर ने की। इस दौरान कृषक प्रतिनिधि, गन्ना विभाग के अधिकारी, चीनी मिल प्रबंधन और संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। पडरौना चीनी मिल पुनः संचालन को लेकर किसानों और प्रशासन के बीच सकारात्मक संवाद इस बैठक का प्रमुख केंद्र रहा।
150 एकड़ भूमि पर अनियमितता उजागर
जिलाधिकारी ने बैठक में जानकारी दी कि भूमि अभिलेखों की गहन जांच के दौरान करीब 150 एकड़ भूमि से जुड़ी अनियमितताएं सामने आई हैं। इनमें लगभग 100 एकड़ भूमि ऐसी पाई गई है जिस पर वर्तमान में खेती की जा रही है, जबकि लगभग 50 एकड़ भूमि पर अवैध खरीद-फरोख्त और कब्जे की पुष्टि हुई है।
प्रशासन ने स्पष्ट किया कि अवैध कब्जों के संबंध में विधिक कार्रवाई प्रारंभ कर दी गई है। पडरौना चीनी मिल पुनः संचालन के मार्ग में आने वाली सभी बाधाओं को दूर करने के लिए राजस्व विभाग और संबंधित एजेंसियां समन्वित कार्रवाई कर रही हैं।
किसानों की प्रमुख मांग: मिल दोबारा शुरू हो
बैठक में कृषक प्रतिनिधि छोटेलाल सिंह सहित अन्य किसानों ने बंद पड़ी मिल को पुनः संचालित कराने की मांग प्रमुखता से रखी। किसानों का कहना था कि मिल बंद होने से क्षेत्र के गन्ना उत्पादकों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
किसानों ने भरोसा दिलाया कि यदि कोई सक्षम निवेशक या पक्ष मिल संचालन के लिए आगे आता है, तो वे अपने गन्ना मूल्य भुगतान से जुड़े लंबित वाद माननीय उच्च न्यायालय से वापस लेने को तैयार हैं।
यह पहल पडरौना चीनी मिल पुनः संचालन के लिए एक महत्वपूर्ण सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
मूलधन लेने को तैयार किसान, ब्याज छोड़ने पर सहमति
बैठक का सबसे महत्वपूर्ण बिंदु यह रहा कि किसानों ने बकाया भुगतान के संबंध में बड़ा समझौता प्रस्तावित किया। उन्होंने कहा कि वे केवल मूलधन लेने को तैयार हैं और ब्याज की राशि छोड़ने पर सहमत हैं, ताकि मिल संचालन में कोई कानूनी या वित्तीय बाधा उत्पन्न न हो।
यह निर्णय प्रशासन और संभावित निवेशकों के लिए राहतकारी साबित हो सकता है। इससे पडरौना चीनी मिल पुनः संचालन की प्रक्रिया को गति मिलने की उम्मीद है।
शपथ-पत्र शीघ्र उपलब्ध कराने के निर्देश
जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर ने कृषक प्रतिनिधियों से कहा कि संबंधित वादकारियों के शपथ-पत्र जल्द उपलब्ध कराए जाएं, जिससे कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सके।
साथ ही चीनी मिल प्रबंधन को भी निर्देशित किया गया कि वे इस विषय में सकारात्मक पहल करें और संभावित निवेशकों से संवाद स्थापित करें।
प्रशासन का मानना है कि यदि सभी पक्ष मिलकर सहयोग करें तो पडरौना चीनी मिल पुनः संचालन शीघ्र संभव हो सकता है।
रोजगार और आय वृद्धि की उम्मीद
जिलाधिकारी ने बैठक में कहा कि मिल के पुनः संचालन या नई इकाई की स्थापना से क्षेत्र में गन्ना क्षेत्रफल बढ़ेगा। इससे किसानों की आय में वृद्धि होगी और स्थानीय युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि चीनी मिल केवल एक औद्योगिक इकाई नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की आर्थिक धुरी है। पडरौना चीनी मिल पुनः संचालन से व्यापार, परिवहन और सहायक उद्योगों को भी बढ़ावा मिलेगा।
ड्रेनों की सफाई और आधारभूत तैयारियां
बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने चीनी मिल प्रतिनिधियों को निर्देश दिए कि समय रहते ड्रेनों की सफाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने शीघ्र ड्रेनों की सूची उपलब्ध कराने को कहा, ताकि आगामी पेराई सत्र से पहले सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त की जा सकें।
सिंचाई और बाढ़ खंड विभाग को भी समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए गए।
गन्ना विभाग और अधिकारियों की मौजूदगी
बैठक में जिला गन्ना अधिकारी हुदा सिद्दीकी सहित विभिन्न चीनी मिलों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। इसके अलावा बाढ़ खंड और सिंचाई विभाग के अधिकारी भी मौजूद रहे।
सभी अधिकारियों ने आश्वस्त किया कि पडरौना चीनी मिल पुनः संचालन के लिए आवश्यक प्रशासनिक और तकनीकी सहयोग प्रदान किया जाएगा।
आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण फैसला
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पडरौना चीनी मिल पुनः चालू होती है तो यह न केवल कुशीनगर बल्कि आसपास के जिलों के लिए भी आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण कदम होगा।
गन्ना किसान लंबे समय से मिल के पुनः संचालन की मांग कर रहे थे। अब प्रशासनिक सक्रियता और किसानों के सहयोगात्मक रुख से उम्मीद जगी है कि वर्षों से बंद यह औद्योगिक इकाई एक बार फिर चालू हो सकेगी।
निष्कर्ष: सकारात्मक संकेतों के बीच आगे की राह
कुशीनगर प्रशासन की पहल, किसानों का सहयोग और कानूनी अड़चनों को दूर करने की प्रक्रिया ने पडरौना चीनी मिल पुनः संचालन को लेकर नई उम्मीद पैदा की है।
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि संभावित निवेशक या सक्षम पक्ष कब आगे आता है और मिल के पुनर्जीवन की प्रक्रिया को औपचारिक रूप से गति मिलती है।
यदि सभी पक्षों के प्रयास सफल होते हैं, तो यह कदम न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करेगा, बल्कि पूरे क्षेत्र के औद्योगिक विकास में नई ऊर्जा का संचार करेगा।
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