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विभाजन से विद्रोह तक: ऋत्विक घटक के सिनेमा पर गहन चर्चा

ऋत्विक घटक पर मंथन, दो महत्वपूर्ण पुस्तकों का विमोचन—मीरा रोड में सिनेमा और समाज पर गूंजती बहस

लेखक: संजय भिसे / हृदयेश मयंक

मुंबई, (राष्ट्र की परम्परा) जनवादी लेखक संघ एवं स्वर संगम फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में मीरा रोड स्थित विरूंगला केन्द्र (इंदिरा गांधी हॉस्पिटल परिसर) में आयोजित एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक कार्यक्रम में बांग्ला सिनेमा के महान फिल्मकार ऋत्विक घटक के सिनेमा, उनके विचार और सामाजिक सरोकारों पर गहन चर्चा की गई। इस अवसर पर दो महत्वपूर्ण पुस्तकों का विमोचन भी हुआ, जिसने कार्यक्रम को विशेष बना दिया।
कार्यक्रम में जाहिद खान एवं जयनारायण प्रसाद द्वारा संपादित पुस्तक ‘ऋत्विक घटक: नव यथार्थवाद सिनेमा का कलात्मक सर्जक’ तथा जाहिद खान द्वारा अनुवादित कृष्ण चंदर के उर्दू नाटक ‘दरवाजा खोल दो’ (हिंदी अनुवाद) का लोकार्पण किया गया। दोनों ही कृतियां साहित्य और सिनेमा के गंभीर पाठकों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने ऋत्विक घटक के सिनेमा को केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि सामाजिक संघर्ष, इतिहास और मानवीय संवेदनाओं का सशक्त दस्तावेज बताया। उनके सिनेमा में विभाजन की त्रासदी, विस्थापन, शरणार्थियों का दर्द और सामाजिक विघटन अत्यंत प्रभावशाली ढंग से उभरकर सामने आता है। घटक की फिल्मों में यथार्थवाद, मिथकीय प्रतीकों, ब्रेख्तियन शैली और ध्वनि प्रयोग का अद्वितीय समावेश देखा जाता है।
प्रमुख वक्ता पुलक चक्रवर्ती ने बताया कि ऋत्विक घटक मार्क्सवादी विचारधारा से गहराई से प्रभावित थे और भारतीय जन नाट्य संघ (IPTA) के माध्यम से उन्होंने अपनी सांस्कृतिक यात्रा शुरू की। उन्होंने कला को जनता की पीड़ा और आकांक्षाओं की अभिव्यक्ति का माध्यम माना। उनकी फिल्मों में वर्ग संघर्ष, पूंजीवाद की आलोचना और सामाजिक न्याय की स्पष्ट झलक मिलती है।

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फिल्म निर्देशक अविनाश दास ने कहा कि ऋत्विक घटक का सिनेमा अत्यंत मौलिक है और उन्होंने सिनेमा की भाषा को नए सिरे से गढ़ा। उन्होंने फिल्म निर्माण की चुनौतियों का जिक्र करते हुए कहा कि अपनी शर्तों पर सिनेमा बनाना ही सबसे बड़ी उपलब्धि है, जो घटक ने हासिल की।
डॉ. हूबनाथ पांडे ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि भाषा की बाधा के बावजूद विजुअल माध्यम से घटक के सिनेमा को समझा जा सकता है। उन्होंने फिल्म सोसाइटी की स्थापना की आवश्यकता पर जोर देते हुए मीरा रोड में इसकी शुरुआत का प्रस्ताव रखा।
जाहिद खान ने कहा कि हिंदी पट्टी में ऋत्विक घटक को सीमित रूप से जाना गया है, जबकि वे मृणाल सेन और सत्यजीत राय के समकक्ष एक बड़े फिल्मकार थे। उन्होंने घटक को मूल रूप से नाटककार बताते हुए कहा कि सिनेमा के माध्यम से उन्होंने व्यापक दर्शकों तक अपनी बात पहुंचाई।

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संजय भिसे ने अपने वक्तव्य में कहा कि घटक ने सिनेमा को समाज और इतिहास से जोड़ा और उसे एक वैचारिक माध्यम बनाया। वहीं जयनारायण प्रसाद ने सत्यजीत राय, मृणाल सेन और ऋत्विक घटक के संबंधों पर प्रकाश डालते हुए उनकी फिल्म मेघे ढाका तारा का विशेष उल्लेख किया।
कार्यक्रम में अजय रोहिल्ला, हरि मृदुल, फरीद खान सहित कई वक्ताओं ने घटक के सिनेमा की दृश्यात्मकता, कथात्मक शक्ति और यथार्थवादी दृष्टिकोण की सराहना की। हृदयेश मयंक ने बताया कि फिल्म सोसाइटी के गठन को लेकर जल्द ही बैठक आयोजित की जाएगी।
कार्यक्रम का संचालन रमन मिश्र ने किया, जबकि हरिप्रसाद राय ने सभी का आभार व्यक्त किया। यह आयोजन न केवल सिनेमा प्रेमियों के लिए ज्ञानवर्धक रहा, बल्कि मीरा रोड क्षेत्र में सांस्कृतिक गतिविधियों के विस्तार की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।

Editor CP pandey

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