Economic Survey 2026: रामायण की सीख, चीन के हैनान मॉडल का जिक्र

यूनियन बजट से पहले केंद्र सरकार की ओर से संसद में Economic Survey 2026 पेश किया गया। इस आर्थिक सर्वेक्षण में भारत की विकास रणनीति को समझाने के लिए प्राचीन महाकाव्य रामायण के एक प्रसंग का उदाहरण दिया गया है। सर्वे में यह बताया गया है कि भारत किस तरह अपने विरोधियों से भी सीख लेकर आगे बढ़ सकता है। साथ ही, यह भी साफ किया गया है कि यह प्रक्रिया आत्मनिर्भरता और स्वायत्तता से समझौता किए बिना संभव है।

रामायण के युद्ध कांड से क्या सीख बताई गई?

आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में रामायण के युद्ध कांड से जुड़ी सीख का उल्लेख किया गया है। इसके अनुसार, कठिन परिस्थितियों में भी रणनीति, धैर्य और सीखने की क्षमता सबसे अहम होती है।

सर्वे का मानना है कि आज की जटिल वैश्विक अर्थव्यवस्था में यह संदेश बेहद प्रासंगिक है। तेज होते वैश्विक तनाव और अस्थिर वित्तीय हालात के बीच भारत इस सोच को अपनी अंतरराष्ट्रीय रणनीति के रूप में अपना सकता है।

चीन ने हैनान को बनाया फ्री ट्रेड हब

इकोनॉमिक सर्वे में चीन के हैनान फ्री ट्रेड पोर्ट का भी जिक्र किया गया है। चीन ने पूरे हैनान द्वीप को एक विशेष आर्थिक क्षेत्र के रूप में विकसित किया है।

2025 के अंत तक यहां पूरी तरह सीमा शुल्क व्यवस्था लागू कर दी गई है। इसके चलते यह इलाका कम टैरिफ वाला जोन बन चुका है।

हैनान का कस्टम सिस्टम क्यों है खास?

हैनान का कस्टम सिस्टम चीन के बाकी हिस्सों से अलग रखा गया है। यहां आयात पर बेहद कम शुल्क लिया जाता है।
इसके अलावा, स्थानीय स्तर पर पर्याप्त वैल्यू एडिशन के बाद तैयार किए गए उत्पादों को बिना किसी अतिरिक्त टैक्स के पूरे चीन में बेचा जा सकता है। इससे निवेशकों और व्यापारियों को बड़ा फायदा मिल रहा है।

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भारत के लिए क्या संकेत देता है हैनान मॉडल?

वहीं, इकोनॉमिक सर्वे में कहा गया है कि भारत को हैनान फ्री ट्रेड पोर्ट को सिर्फ एक चुनौती के रूप में नहीं देखना चाहिए।
यह एक बड़े और धीरे-धीरे होने वाले बदलाव का संकेत है। आने वाले समय में यह एशिया के व्यापार मार्गों, लॉजिस्टिक्स सिस्टम और निवेश फैसलों को प्रभावित कर सकता है।

खासतौर पर उत्तरी हिंद महासागर और दक्षिण चीन सागर क्षेत्र में इसका असर देखने को मिल सकता है।

वैश्विक हालात को लेकर बढ़ती चिंता

इसके अलावा, सर्वे यह भी बताता है कि ये सभी बदलाव एक मुश्किल वैश्विक माहौल में हो रहे हैं। हालांकि दुनिया की अर्थव्यवस्था ने 2025 के झटकों को उम्मीद से बेहतर संभाल लिया था।

लेकिन अब हालात पहले जैसे सामान्य नहीं रहे हैं। अलग-अलग देशों की अर्थव्यवस्थाओं, बाजारों और राजनीतिक सिस्टम में आगे चलकर मध्यम से गंभीर स्तर की परेशानियों की आशंका बढ़ गई है।

आगे क्या हो सकता है?

आर्थिक सर्वे के अनुसार आने वाले समय में स्थिरता से ज्यादा उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। ऐसे में भारत के लिए जरूरी होगा कि वह अपनी नीतियों को लचीला और दूरदर्शी बनाए।

रामायण की सीख और वैश्विक उदाहरणों को ध्यान में रखते हुए भारत अपनी आर्थिक रणनीति को और मजबूत कर सकता है।

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Karan Pandey

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