गुरुवार को देखा जाएगा ईद का चांद इबादत में बीता 28वां रोजा

गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)
जहन्नम से आजादी का अशरा चल रहा है। ईद आने वाली है। नमाज, रोजा, तिलावत व नेक कामों के जरिए अल्लाह की इबादत की जा रही है। बुधवार को 28वां रोजा अल्लाह व रसूल की याद में गुजरा। खूब रो-रो कर दुआ मांगी जा रही है। तरावीह की नमाज जारी है। रोजेदार एतिकाफ में मश्गूल हैं, शबे कद्र की अंतिम (29वीं) ताक रात में खूब इबादत हुई। बाजार में ईद की खरीदारी जोरों पर है। अल कलम एसोसिएशन की ओर से मरकजी नूरी जामा मस्जिद अहमदनगर चक्शा हुसैन में ‘किताबें बुला रही हैं’ नाम से दीनी किताबों का स्टॉल लगाया गया। जिसे अवाम ने काफी सराहा। स्टॉल लगाने में मौलाना गुलाम हुसैन अजीजी, शमशाद खान भोला, मुजफ्फर हसनैन रूमी, आसिफ महमूद, हस्सान, नेहाल अहमद ने महती भूमिका निभाई। गौसे आजम फाउंडेशन के समीर अली, मो. फैज, अमान अहमद, रियाज अहमद व मो. शारिक ने जरूरतमंदों में खाद्य पदार्थ की ईद किट बांटी।
वहीं इस्लाम धर्म के मानने वाले गुरुवार 19 मार्च को 29वां रोजा पूरा करके ईद का चांद (शव्वाल माह) देखेंगे। अगर चांद नजर आ गया तो शुक्रवार 20 मार्च को ईद का त्योहार मनाया जाएगा। अगर चांद नहीं दिखा तो शुक्रवार को 30वां रोजा मुकम्मल करके शनिवार 21 मार्च को ईद का त्योहार मनाया जाएगा। उलमा किराम ने चांद देखने की तैयारी पूरी कर ली है।
शहर काजी मुफ्ती मुहम्मद अजहर शम्सी ने बताया कि पांच महीनों का चांद देखना वाजिबे किफाया है शाबान, रमजान, शव्वाल, जीकादा, जिलहिज्जा। पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया कि महीना 29 का भी होता है और 30 का भी। रोजा चांद देख कर शुरु करो और चांद देख कर रोजा बंद कर दो। अगर आसमान साफ नहीं है तो 30 की गिनती पूरी करो।
मुफ्ती-ए-शहर अख्तर हुसैन मन्नानी ने बताया कि ईदगाह का अर्थ होता है खुशी की जगह या खुशी का समय। यह ऐसी जगह है जहां पर बंदे दो रकात नमाज पढ़कर अल्लाह का शुक्र अदा करते हैं। जब बंदा 29 या 30 दिन का रोजा पूरा कर लेता है तो अल्लाह तआला उसे खुशी मनाने का हुक्म देता है।
कारी मुहम्मद अनस नक्शबंदी ने बताया कि ईदगाह में ईद की नमाज अदा करना पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम व सहाबा किराम की सुन्नत है, इसलिए कोशिश रहे कि ईद की नमाज ईदगाह में ही अदा करें। ईदगाह दो ईदों के लिए ही बनाई गई है। ईद-उल-फित्र की नमाज के लिए जाते हुए रास्ते में आहिस्ता से तकबीरे तशरीक ‘अल्लाहु अकबर, अल्लाहु अकबर, ला इलाहा इल्लल्लाह, वल्लाहु अकबर, अल्लाहु अकबर, व लिल्लाहिल हम्द’ पढ़ी जाएगी। नमाज ईदगाह में जाकर पढ़ना और रास्ता बदल कर आना, पैदल जाना और रास्ते में तकबीरे तशरीक पढ़ना सुन्नत है। पैगंबर-ए-इस्लाम ईद-उल-फित्र के दिन कुछ खाकर नमाज के लिए तशरीफ ले जाते। ईद को एक रास्ते से तशरीफ ले जाते और दूसरे से वापस होते।
काजी की इजाजत से ईदगाह या मस्जिद में दो बार ईद की नमाज हो सकती है : उलमा किराम
रमजान हेल्पलाइन नंबर 8604887862, 9598348521, 9956971232, 7860799059 पर बुधवार को सवाल ओ जवाब का सिलसिला जारी रहा।

सवाल : एक ही ईदगाह या मस्जिद में दो बार ईद की नमाज अदा करना कैसा?

जवाब : आम हालात में ऐसा करना मकरुह है। अलबत्ता किसी खास सूरत-ए-हाल में शहर के काजी या सबसे बड़े सहीहुल अकीदा आलिम जिसके तरफ लोग शरअ के मसाइल में रूजू करते हों उसकी इजाजत लेकर कायम की जा सकती है।

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