20 जुलाई को सियाचिन ग्लेशियर में साथियों को बचाने में हुए थे शहीद
देवरिया(राष्ट्र की परम्परा) जिले के निवासी और सेना के मेडिकल कोर में कैप्टन शहीद अंशुमान सिंह को गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर कीर्ति चक्र मरणोपरांत देने की घोषणा की गई है। सियाचिन ग्लेशियर में अपने साथियों को बचाने और अदम्य साहस का प्रदर्शन करते हुए कैप्टन अंशुमान शहीद हो गए थे।
जिले के लार विकास खंड के बरडीहा दलपत गांव निवासी रवि प्रताप सिंह और मंजू सिंह के पुत्र अंशुमान सिंह ने आर्म्ड फोर्स मेडिकल कॉलेज पुणे में चयन के बाद वहां से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने के बाद अंशुमान का चयन सेना की मेडिकल कोर में हो गया। आगरा मिलिट्री हॉस्पिटल में ट्रेनिंग के बाद डा. अंशुमान सिंह की तैनाती आगरा में ही हो गई। 5 जुलाई को उनकी तैनाती सियाचिन ग्लेशियर में हुई थी। जहां गोला बारूद के भंडार में शार्ट सर्किट से आग लग जाने के कारण उन्होंने अपनी जान की परवाह नहीं करते हुए साथियों को सही सलामत निकालने में लगे रहे। कई प्रयासों में उन्होंने अनेक सैनिकों को बंकर से बाहर निकाला। बाहर निकालने के क्रम में ही आग के गोले के चपेट में आकर शहीद हो गए।
शहादत के 5 महीने पूर्व हुई थी शादी
कैप्टन अंशुमान की शादी शहादत से 5 महीने 10 दिन पूर्व पठानकोट की रहने वाली और पेशे से मल्टीनेशनल कंपनी में इंजीनियर स्मृति सिंह से हुई थी। स्मृति के माता –पिता स्कूल में प्रधानाचार्य हैं। वहीं शहीद अंशुमान के पिता रवि प्रताप सिंह सेना से सेवानिवृत्त जेसीओ हैं। शहीद के भाई घनश्याम सिंह और बहन तान्या सिंह नोएडा में डॉक्टर हैं।
कीर्ति चक्र तीसरा बड़ा सैन्य सम्मान
कीर्ति चक्र एक भारतीय सैन्य सम्मान है जो युद्ध के मैदान से दूर वीरता, साहसी कार्रवाई या आत्म बलिदान के लिए दिया जाता है।
बोले पिता
सेना के सेवानिवृत जेसीओ और शहीद अंशुमान के पिता रवि प्रताप सिंह ने कहा कि बेटे की शहादत पर नाज है। फौजी हूं, युद्ध क्षेत्र की कठिनाइयों को समझ सकता हूं। बेटे को भले खोया है लेकिन शहादत का गर्व है। यह कहते हुए बुजुर्ग पिता के आखों से निकले आंसू गालों पर लुढ़क जाते हैं।
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