भारत और विश्व के इतिहास में 5 दिसंबर

5 दिसंबर – इतिहास के वे अमर सितारे, जिनकी विदाई ने समय को भी नम कर दिया

5 दिसंबर का दिन इतिहास के पन्नों में उन महान व्यक्तित्वों के लिए विशेष स्थान रखता है, जिन्होंने अपने विचारों, संघर्ष और रचनात्मकता से दुनिया को वोनई दिशा दी। यह दिन कई ऐसे व्यक्तियों की पुण्यतिथि है, जिनकी विरासत आज भी लोगों के जीवन को प्रेरित करती है।

तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जे. जयललिता (जन्म: 24 फरवरी 1948, मैसूर, कर्नाटक) का निधन 5 दिसंबर 2016 को हुआ। वे ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम (AIADMK) की प्रमुख नेता थीं। अपने सशक्त नेतृत्व, जनकल्याण योजनाओं और महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को बढ़ाने के लिए वे विशेष रूप से जानी जाती हैं। तमिलनाडु के विकास में उनका योगदान ऐतिहासिक रहा।

नेल्सन मंडेला (जन्म: 18 जुलाई 1918, म्वेज़ो, दक्षिण अफ्रीका) का निधन 5 दिसंबर 2013 को हुआ। वे दक्षिण अफ्रीका के पहले अश्वेत राष्ट्रपति थे और उन्हें भारत सरकार द्वारा भारत रत्न से भी सम्मानित किया गया। रंगभेद के खिलाफ उनका संघर्ष पूरी दुनिया के लिए समानता, शांति और मानवाधिकारों की प्रतीक बन गया।

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गुरबचन सिंह सालारिया (जन्म: 29 नवंबर 1935, गुरदासपुर, पंजाब) ने देश की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर किए और उन्हें मरणोपरांत परम वीर चक्र से सम्मानित किया गया। उनका बलिदान भारतीय सेना के शौर्य का अमिट उदाहरण है।

हुसैन अहमद मदनी (जन्म: 1879, बांकीपुर, बिहार) एक महान इस्लामी विद्वान और स्वतंत्रता सेनानी थे। उन्होंने विदेशी शासन के विरुद्ध आवाज़ उठाई और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई।

प्रसिद्ध उर्दू शायर मजाज़ लखनवी 1955 (जन्म: लखनऊ, उत्तर प्रदेश) की शायरी युवाओं में क्रांति और प्रेम की भावना जगाती थी। उनकी कविताएँ आज भी साहित्य जगत में अमर हैं।

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भारतीय कला के जनक कहे जाने वाले अवनीन्द्रनाथ ठाकुर 1951 (जन्म: कोलकाता, पश्चिम बंगाल) ने बंगाल स्कूल ऑफ आर्ट की स्थापना की। उन्होंने भारतीय चित्रकला को नई पहचान दी।

अरबिंदो घोष 1950 (जन्म: कोलकाता, पश्चिम बंगाल) एक महान दार्शनिक, लेखक और योगी थे। उनके विचार आज भी अध्यात्म और राष्ट्रीय चेतना का मार्ग प्रशस्त करते हैं।

प्रसिद्ध चित्रकार अमृता शेरगिल 1941 (जन्म: बुडापेस्ट, हंगरी; भारतीय मूल – पंजाब) आधुनिक भारतीय कला की अग्रदूत थीं। उन्होंने भारतीय ग्रामीण जीवन और स्त्री भावनाओं को अपने चित्रों में जीवंत रूप दिया।

एस. सुब्रह्मण्य अय्यर 1924 (जन्म: 1866, तमिलनाडु) एक स्वतंत्रता सेनानी, पत्रकार और समाज सुधारक थे। उन्होंने सामाजिक चेतना फैलाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

इन महान आत्माओं का योगदान केवल इतिहास नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का दीपस्तंभ है। 5 दिसंबर केवल एक तारीख नहीं, बल्कि त्याग, संघर्ष और सेवा की अनंत कहानी है।

Editor CP pandey

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