गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। शिक्षा मंत्रालय की भारतीय भाषा पुस्तक योजना के तहत दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। विश्वविद्यालय 14 विषयों की 31 पुस्तकें प्रकाशित करने जा रहा है, जिनमें से 27 मौलिक पुस्तकें और 4 अनूदित पुस्तकें होंगी। यह परियोजना केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की भारतीय भाषा पुस्तक योजना के अंतर्गत आती है। जिसका उद्देश्य भारतीय भाषाओं में पाठ्यपुस्तकों को डिजिटल रूप में उपलब्ध कराना है। यह योजना शिक्षा में क्षेत्रीय भाषाओं को बढ़ावा देने और भारतीय भाषाओं में उत्कृष्ट पुस्तकों की कमी दूर करने के लिए शुरू की गई है। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय द्वारा प्रस्तावित पुस्तकों में सामाजिक एवं मानविकी संकाय से 14, विज्ञान संकाय से 9, वाणिज्य से 2 तथा अभियांत्रिकी संकाय से हिंदी भाषा में 2 पुस्तकों के लेखन के प्रस्ताव शामिल हैं। इसके अलावा कला संकाय से 3 तथा विज्ञान संकाय से 1 पुस्तक के अनुवाद का प्रस्ताव भी दिया गया है। विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि यह परियोजना हमारे शिक्षकों की विद्वता और क्षमता का द्योतक है। इससे राष्ट्रीय स्तर पर विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा बढ़ेगी और विद्यार्थी भी लाभान्वित होंगे। यह परियोजना राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के दृष्टिकोण के अनुरूप है, जो मातृभाषा आधारित शिक्षा पर जोर देती है।
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