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बाढ़ प्रभावित टोलों में स्वास्थ्य सुविधा और चारे का संकट, कांग्रेस प्रवक्ता ने किया निरीक्षण

बरहज/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। बरहज तहसील क्षेत्र के परसिया देवार एवं विशुनपुर देवार के करीब 12 से 14 टोले बाढ़ के पानी से घिरकर टापू में तब्दील हो गए हैं। ग्रामीणों के सामने स्वास्थ्य सुविधा, खाद्यान्न और पशुओं के चारे की गंभीर समस्या बनी हुई है। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन की ओर से केवल एक नाव उपलब्ध कराई गई है, जिसके सहारे उन्हें रोजमर्रा की जरूरतों के लिए आवागमन करना पड़ रहा है।ग्राम प्रधान ओम प्रकाश यादव ने बताया कि गांव में अभी तक सरकार की ओर से कोई राहत सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई है। उनका कहना है कि बाढ़ की स्थिति के बावजूद कोई अधिकारी या कर्मचारी ग्रामीणों की समस्याओं का जायजा लेने नहीं पहुंचा। ग्रामीणों गंगा यादव, इंद्रासन यादव, दिनेश, प्रहलाद और सत्या आदि ने बताया कि एक छोटी नाव के सहारे उन्हें अपने बच्चों के भोजन, पशुओं के चारे और स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों के लिए 24 घंटे आवागमन करना पड़ रहा है।ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ के कारण आवागमन पूरी तरह प्रभावित हो गया है। बीमार लोगों को उपचार के लिए बरहज अथवा मऊ ले जाना भी मुश्किल हो रहा है। वहीं पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था करना भी चुनौती बन गया है। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल राशन किट, स्वास्थ्य टीम और पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था कराने की मांग की है।गुरुवार को विशुनपुर देवार पहुंचे कांग्रेस प्रवक्ता रवि प्रताप सिंह ने बाढ़ से टापू बने टोलों का निरीक्षण कर ग्रामीणों की समस्याएं जानीं। उन्होंने उपजिलाधिकारी से वार्ता कर बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए राशन किट, स्वास्थ्य कर्मियों की तैनाती तथा पशुओं के लिए चारे की तत्काल व्यवस्था सुनिश्चित कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि दो दिन के भीतर ग्रामीणों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गईं तो तीसरे दिन आमरण अनशन करने के लिए मजबूर होंगे।वहीं परसिया देवार के ग्राम प्रधान शंकर प्रसाद तथा मंटू यादव ने बताया कि गांव के करीब 12 से 14 टोले बाढ़ के पानी से घिरे हैं। बाढ़ से पहले नाव के जरिए एक से दो घंटे में बरहज तक आवागमन हो जाता था, लेकिन बाढ़ के बाद नदी के उस पार जाने के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध नहीं हैं। ग्रामीणों का कहना है कि दो से तीन महीने तक रहने वाली बाढ़ उनके लिए किसी श्रापित माह से कम नहीं होती। उन्होंने प्रशासन से बाढ़ प्रभावित गांवों में राहत एवं स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ाने की मांग की है।

Editor CP pandey

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