हाइट एवं वेट मेजरमेंट रैंकिंग में जनपद को प्रदेश में चौथा स्थान
बच्चों की संख्या में आई कमी
देवरिया (राष्ट्र की परम्परा) बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग द्वारा जनपद में संचालित योजनाओं के सुखद परिणाम देखने को मिल रहे हैं। हाल ही में आईसीडीएस निदेशालय द्वारा जारी हाइट एंड वेट मेजरमेंट रैंकिंग में जनपद को प्रदेश में चौथा स्थान प्राप्त हुआ है। सीडीओ रवींद्र कुमार ने बताया कि इस वर्ष सैम बच्चों के संख्या में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। सैम श्रेणी के बच्चे फैट एवं मांसपेशी की कमी की वजह से बहुत कमजोर एवं दुबले पतले होते हैं। वजन और हाइट मापन के द्वारा इन्हें चिन्हित किया जाता है। गतवर्ष जनपद में 7,153 बच्चे सैम के रूप में चिन्हाकित हुए थे, उनमें से 2,018 बच्चे इस श्रेणी से बाहर होकर स्वस्थ हो चुके हैं। उन्होंने बताया कि सैम बच्चों का पोषण स्तर सुधारने के लिए संभव अभियान के तहत विशेष प्रयास किये जा रहे हैं। ग्राम स्वास्थ्य पोषण दिवस प्रत्येक बुधवार एवं शनिवार को आयोजित किया जा रहा है। आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां रोस्टरवार डोर-टू-डोर अभियान चलाकर सैम बच्चों को चिन्हित करती हैं एवं उन्हें निकटवर्ती केंद्र पर लाकर उनका हाइट एवं वेट का मेजरमेंट करा रही हैं। जो बच्चे हाइट एवं वेट के आधार पर सैम श्रेणी में आते हैं, उन्हें छह दवाओं की किट दी जाती है, जिसमें अमोक्सीसिलिन, एल्बेंडाजोल, फोलिक एसिड टेबलेट, विटामिन ए सिरप, आयरन व मल्टीविटामिन सिरप आदि शामिल होते हैं। इसके अतिरिक्त सैम बच्चों के अभिभावकों की भी काउंसलिंग की जा रही है, जिसमें उन्हें बच्चों को पोषणयुक्त भोजन एवं व्यायाम के विषय में जानकारी दी जाती है। आंगनबाड़ी केंद्रों पर आने वाले बच्चों को टेक होम राशन के तहत फोर्टिफाइड राइस, दाल, गेहूं की दलिया एवं तेल भी दिया जाता है। अभियान की सतत निगरानी पोषण ट्रैकर एप के माध्यम से की जाती है। सीडीओ ने बताया कि अभियान की नियमित समीक्षा की जा रही है, जिसका परिणाम आने लगा है। सीडीओ ने आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों सहित समस्त आइसीडीएस विभाग के कार्मिकों को बधाई दी। आंगनबाड़ी केंद्र बच्चों के बचपन को सवारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
जिला कार्यक्रम अधिकारी कृष्णकांत राय ने बताया कि वर्तमान समय में जनपद में कुल 3,243 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं, जिनमें 1.67 लाख 3-6 आयुवर्ग के बच्चे जुड़े हैं। वर्तमान समय में समूह अभियान के तहत स्वास्थ विभाग के सहयोग से एक क्रम सुपोषण की ओर अभियान चलाया जा रहा है। शीघ्र ही शेष बचे 5,045 सैम बच्चों को भी स्वस्थ बच्चों की श्रेणी में लाया जाएगा।
आंगनबाड़ी भवनों का हो रहा कायाकल्प
सीडीओ रवींद्र कुमार ने बताया कि जनपद में आंगनबाड़ी भवनों के आधुनिकीकरण किया जा रहा है। अभी हाल ही में लंबे समय से निर्माणधीन 59 आंगनबाड़ी भवनों को पूर्ण कराया गया है। इनमें से कुछ भवन 2013 से निर्माणाधीन थे। इस वित्तीय वर्ष में 113 नए भवन बनाये जा रहे हैं।
पंचतंत्र एवं हितोपदेश की कहानियों से दिए जा रहे संस्कार
सीडीओ रवींद्र कुमार ने बताया कि आंगनबाड़ी केंद्रों में आने वाले बच्चों को सर्वप्रथम भावगीत प्रार्थना कराई जाती है। इसके बाद बच्चों को खेल-खेल में प्रारंभिक अक्षर ज्ञान, संख्या ज्ञान एवं जोड़-जोड़कर वाक्य बोलना सीखाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि मॉडल केंद्रों पर बच्चों को पंचतंत्र एवं हितोपदेश सहित विभिन्न प्रकार की बाल कहानियों के माध्यम से नैतिकतापरक एवं संस्कारित करने वाले मूल्य सिखाये जा रहे हैं।
एक संग एप पर दान करने का किया अनुरोध
सीडीओ रवींद्र कुमार ने बताया कि बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग ने सामुदायिक सहभागिता आधारित एक संग एप विकसित किया है, जिसे प्लेस्टोर से डाउनलोड किया जा सकता है। इस एप पर समस्त आंगनबाड़ी केंद्रों की मैपिंग की गई है। इसके माध्यम से जनपद में स्थित आंगनबाड़ी केंद्रों ने अपनी छोटी-छोटी जरूरतों को इंगित किया है। आमजन आंगनबाड़ी केंद्रों पर आने वाले बच्चों के खेलने के लिए खिलौने, किताब, कुर्सी-मेज सहित अन्य वस्तुएं दान कर सकते हैं। सीडीओ ने जनपदवासियों से एक संग एप के माध्यम से आंगनबाड़ी केंद्रों को घर में पड़ी अप्रयुक्त किताबें, खिलौने इत्यादि डोनेट करने का अनुरोध किया।
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