महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)जिले के नौतनवां ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पंचायत हरदी डाली में शुक्रवार को बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के तहत एक प्रभावशाली जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। उच्च प्राथमिक विद्यालय परिसर में सेवा भारती के तत्वावधान में हुए इस कार्यक्रम में बाल विवाह जैसी सामाजिक कुप्रथा के दुष्परिणामों, इसके कानूनी पहलुओं और समाज पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं, शिक्षकगण और ग्रामीण उपस्थित रहे।
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कार्यक्रम के मुख्य अतिथि नौतनवां नगर पंचायत के चेयरमैन बृजेश मणि त्रिपाठी ने कहा कि बाल विवाह बच्चों के शारीरिक, मानसिक और शैक्षणिक विकास में सबसे बड़ी बाधा है। कम उम्र में विवाह उनके सपनों को कुचल देता है और भविष्य को अंधकारमय बना देता है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि वे शिक्षा को प्राथमिकता दें और सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ आवाज बुलंद करें।
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विशिष्ट अतिथि किशोर मद्धेशिया ने बाल विवाह निषेध कानून की जानकारी देते हुए बताया कि प्रारंभ में शारदा अधिनियम 1929 के तहत विवाह की आयु तय की गई थी, जिसे बाद में संशोधित करते हुए लड़कियों के लिए 18 वर्ष और लड़कों के लिए 21 वर्ष निर्धारित किया गया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2006 में बाल विवाह को पूर्ण रूप से दंडनीय अपराध घोषित किया गया, जिसमें दोषियों के खिलाफ कड़ी सजा का प्रावधान है।
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कार्यक्रम की अध्यक्षता ग्राम प्रधान गोपाल चौधरी ने की। उन्होंने कहा कि केवल कानून नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता ही इस कुप्रथा को समाप्त कर सकती है। अंत में बच्चों और ग्रामीणों ने बाल विवाह मुक्त भारत के संकल्प के साथ समाज से इसे जड़ से मिटाने की शपथ ली।
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