सीबीआई जांच या आंदोलन: पप्पू यादव का अल्टीमेटम, सरकार पर बढ़ा दबाव

पूर्णिया हॉस्टल मौत मामला: सबूत मिटाने का आरोप, पप्पू यादव की CBI जांच की मांग, प्रशासन–नेता–माफिया गठजोड़ का दावा

पटना (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)पूर्णिया के परफैक्ट पीजी हॉस्टल में औरंगाबाद की एक युवती की संदिग्ध मौत ने बिहार की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मामले में पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव ने खुलकर आरोप लगाया है कि यह सिर्फ एक सामान्य मौत नहीं, बल्कि एक सुनियोजित साजिश हो सकती है, जिसमें सबूत मिटाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने प्रशासन, स्थानीय नेताओं और माफिया के बीच संभावित मिलीभगत की आशंका जताई है।
पप्पू यादव रविवार को स्वयं परफैक्ट पीजी हॉस्टल पहुंचे, जहां युवती का शव बरामद हुआ था। मौके पर पहुंचकर उन्होंने हॉस्टल प्रबंधन, स्थानीय लोगों और पुलिस से पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली। इसके बाद मीडिया से बातचीत में वे काफी आक्रोशित नजर आए। उन्होंने कहा कि जिस तरह से घटना के बाद कार्रवाई हुई है, उससे साफ संकेत मिलता है कि सच्चाई को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।
सांसद पप्पू यादव ने इस पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि निष्पक्ष और पारदर्शी जांच के लिए केंद्रीय एजेंसी की जांच बेहद जरूरी है, ताकि किसी भी प्रभावशाली व्यक्ति को बचाया न जा सके। उन्होंने यह भी मांग की कि इस मामले में सिर्फ एक जगह नहीं, बल्कि तीन अलग-अलग स्थानों पर एफआईआर दर्ज होनी चाहिए। उनके अनुसार हॉस्टल, संबंधित थाना और अस्पताल—तीनों की भूमिका की जांच आवश्यक है।

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पप्पू यादव ने हॉस्टल के मालिक से सख्त पूछताछ करने की मांग करते हुए कहा कि बिना उसकी भूमिका की जांच के सच्चाई सामने नहीं आ सकती। इसके साथ ही उन्होंने हॉस्टल में आने-जाने वाले दो संदिग्ध युवकों को तत्काल गिरफ्तार करने की मांग की। उनका कहना था कि जब तक इन संदिग्धों से पूछताछ नहीं होगी, तब तक मौत की असली वजह सामने नहीं आएगी।
इस दौरान उन्होंने बिहार के गृह मंत्री सम्राट चौधरी पर भी निशाना साधा। पप्पू यादव ने तंज कसते हुए कहा कि “सम्राट बाबू जैसे नेता आरोपियों पर बुलडोजर कब चलाएंगे?” उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि इस मामले में निष्पक्ष जांच नहीं हुई और सच्चाई जनता के सामने नहीं लाई गई, तो वे सड़क से सदन तक आंदोलन करेंगे।
यह मामला अब सिर्फ एक युवती की मौत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राज्य की कानून-व्यवस्था, छात्राओं की सुरक्षा और प्रशासनिक पारदर्शिता पर बड़ा सवाल बन चुका है।

Editor CP pandey

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