बिहार पंचायत चुनाव में EBC आरक्षण पर कवायद तेज, पंचायतवार तय हो सकता है हिस्सा
50 फीसदी की सीमा में SC-ST के बाद EBC को मिलेगा आरक्षण, मानकों पर आयोग करेगा अध्ययन
पटना (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। बिहार में पंचायत आम चुनाव 2026 की तैयारियों के बीच अत्यंत पिछड़ा वर्ग (EBC) के आरक्षण को लेकर प्रक्रिया तेज हो गई है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि पंचायत चुनाव में EBC को कितने प्रतिशत आरक्षण मिलेगा। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक इसका निर्धारण एक समान राज्यस्तरीय प्रतिशत के बजाय तय मानकों और पंचायतवार स्थिति के आधार पर किए जाने की दिशा में कवायद चल रही है।
राज्य निर्वाचन आयोग की वेबसाइट के मुताबिक पंचायत आम निर्वाचन 2026 के लिए आरक्षण निर्धारण की प्रक्रिया में जनसंख्या संबंधी प्रपत्र-1 का अंतिम प्रकाशन 15 जून 2026 को किया जा चुका है। आयोग की आरक्षण संबंधी व्यवस्था में अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और पिछड़ा वर्ग के लिए कुल आरक्षण की अधिकतम सीमा 50 प्रतिशत बताई गई है।
क्या है 50 फीसदी की सीमा का फॉर्मूला?
बिहार पंचायत राज अधिनियम के तहत SC और ST के लिए उनकी जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण का प्रावधान है। इसके बाद पिछड़े वर्ग के लिए शेष सीटों में अधिकतम 20 प्रतिशत तक आरक्षण का प्रावधान बताया गया है, जबकि SC, ST और पिछड़ा वर्ग को मिलाकर आरक्षण 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए।
ऐसे में EBC का हिस्सा सीधे 50 प्रतिशत नहीं माना जा सकता। पहले संबंधित क्षेत्र में SC और ST के लिए आरक्षण निर्धारित होगा। इसके बाद 50 प्रतिशत की सीमा के भीतर बची जगह में पिछड़े वर्ग के आरक्षण का निर्धारण किया जाएगा।
उदाहरण के तौर पर, यदि किसी पंचायत में SC-ST की आबादी के आधार पर उनका आरक्षण 40 प्रतिशत बनता है, तो 50 प्रतिशत की अधिकतम सीमा में 10 प्रतिशत तक स्थान शेष रह सकता है। हालांकि वास्तविक आरक्षण संबंधित नियमों, आंकड़ों और अंतिम सरकारी प्रक्रिया के आधार पर ही तय होगा।
पंचायतवार आंकड़े होंगे अहम
इस बार आरक्षण निर्धारण में पंचायतवार आंकड़ों की भूमिका महत्वपूर्ण रहने वाली है। आयोग के अध्ययन में EBC की आबादी, सामाजिक-शैक्षणिक स्थिति, आर्थिक स्थिति और विभिन्न निर्वाचित संस्थाओं में प्रतिनिधित्व जैसे पहलुओं को ध्यान में रखे जाने की बात सामने आई है।
इसका मतलब यह है कि अलग-अलग पंचायतों में EBC आरक्षण का प्रतिशत एक जैसा होना जरूरी नहीं होगा। संबंधित पंचायत के आंकड़ों के आधार पर आरक्षण की स्थिति में अंतर संभव है।
EBC की करीब 122 जातियों पर भी नजर
उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार बिहार में EBC श्रेणी में करीब 122 जातियां शामिल हैं। इनमें कहार, कुम्हार, धानुक, लोहार, तेली, मल्लाह, कानू और नाई जैसी जातियां शामिल हैं। आयोग के अध्ययन में यह भी देखा जा सकता है कि अलग-अलग EBC समुदायों को स्थानीय निकायों में कितना प्रतिनिधित्व मिला है।
आयोग के सामने ये बिंदु रहेंगे महत्वपूर्ण
पंचायत में EBC की आबादी कितनी है?
EBC समुदाय की सामाजिक और शैक्षणिक स्थिति क्या है?
आर्थिक स्थिति कैसी है?
पंचायत और अन्य निर्वाचित संस्थाओं में प्रतिनिधित्व कितना है?
अलग-अलग EBC जातियों को चुनावी प्रतिनिधित्व किस स्तर तक मिला है?
आगे क्या होगा?
EBC आरक्षण के मानकों को लेकर तैयार होने वाली गाइडलाइन के आधार पर आयोग पंचायतवार स्थिति का अध्ययन कर सरकार को अपनी अनुशंसा देगा। इसके बाद सरकार की ओर से रिपोर्ट को चुनावी प्रक्रिया के लिए संबंधित स्तर पर भेजा जाएगा।
इस बीच राज्य निर्वाचन आयोग पंचायत चुनाव 2026 की तैयारियों को आगे बढ़ा रहा है। आयोग की वेबसाइट पर पंचायत परिसीमन, आरक्षण निर्धारण और अन्य चुनावी प्रक्रियाओं से संबंधित अधिसूचनाएं उपलब्ध हैं।
फिलहाल EBC के लिए अंतिम प्रतिशत तय नहीं हुआ है। इसलिए पंचायतवार अध्ययन और निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि किस पंचायत में EBC के लिए कितनी सीटें आरक्षित होंगी।
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