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त्याग, तपस्या और समर्पण से ही भगवान की प्राप्ति संभव: किशोरी शरण जी महाराज

मऊ (राष्ट्र की परम्परा)। भगवान स्वयं साक्षात यज्ञ हैं और समिधा भी। संसार का कोई भी कार्य ईश्वर की कृपा और भूमिका के बिना पूर्ण नहीं हो सकता। इसलिए मनुष्य को भगवान से कुछ मांगने के बजाय, त्याग, तपस्या और पूर्ण समर्पण के माध्यम से स्वयं भगवान को पाने का प्रयास करना चाहिए। यह प्रेरणादायक संदेश श्रीरामचरितमानस के अयोध्या वासी प्रकांड विद्वान कथा वाचक किशोरी शरण जी महाराज ने दिया। वे मऊ नगर के कोतवाली स्थित श्री दक्षिणेश्वर हनुमान मंदिर के वार्षिकोत्सव के अवसर पर आयोजित श्रीराम कथा महायज्ञ में भक्तों को संबोधित कर रहे थे।
किशोरी शरण जी महाराज ने श्रीराम जन्म प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन करते हुए बताया कि जिनके मिलने से मनुष्य को परम शांति और आनंद की अनुभूति हो, वही राम हैं। जो अपने लक्ष्य पर सदैव अडिग रहे, वे लक्ष्मण कहलाए। शत्रुओं का हनन करने वाले शत्रुघ्न और सभी का भरण-पोषण करने वाले भरत नाम से विख्यात हुए। उन्होंने बताया कि श्रीरामलला के दर्शन के लिए स्वयं देवाधिदेव महादेव काकभुसुंडि जी के साथ भेष बदलकर अयोध्या पहुंचे थे।

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कथा के दौरान मुनि विश्वामित्र के साथ श्रीराम और लक्ष्मण के वन गमन, यज्ञ-हवन की रक्षा, ताड़का वध, अहिल्या उद्धार और मां गंगा में स्नान जैसे प्रसंगों का सजीव वर्णन किया गया। इन प्रसंगों ने श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया। कथा के बीच-बीच में प्रस्तुत भजनों ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया और श्रद्धालु मंत्रमुग्ध होकर कथा श्रवण करते रहे।
कार्यक्रम के समापन पर व्यास पूजन और श्रीरामायण जी की विधिवत आरती संपन्न हुई। मंदिर के मुख्य पुजारी विवेकानंद पाण्डेय ने उपस्थित सनातन धर्मावलंबियों, विद्वानों और अतिथियों का स्वागत किया तथा व्यास जी से सभी के लिए आशीर्वाद प्राप्त कराया। इस अवसर पर डॉ. एस.सी. तिवारी, डॉ. राम गोपाल गुप्त, राम आशीष दुबे, पुनीत श्रीवास्तव, छवि श्याम शर्मा, धनेश कुमार, अमित शर्मा, बब्बन सिंह, ऋषिकेश पाण्डेय, शिवधर यादव, आर.के. सिंह, अरुण कुमार, कैलाश चंद जायसवाल, पंकज जायसवाल, राजकुमार खंडेलवाल, वीरू बाबू, अनुराग कपिल खंडेलवाल सहित हजारों श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण कर पुण्य लाभ अर्जित किया।

Editor CP pandey

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