अन्य खबरे

कोई पानी डाल दे तो मैं भी चौंच भर पीलूं: चुपचाप मरते परिंदों की पुकार

तेज़ होती गर्मी, घटते जलस्रोत और बढ़ती कंक्रीट संरचनाओं के कारण पक्षियों के लिए पानी और छांव जैसी बुनियादी ज़रूरतें…

1 year ago

विश्लेषण :

मीडिया में लोक कल्याण और लोक मंगल की भावना डा. कर्नल आदि शंकर मिश्र ‘आदित्य’ आज के वर्तमान परिदृश्य में…

1 year ago

आधी सच्चाई का लाइव तमाशा: रिश्तों की मौत का नया मंच

आजकल लोग निजी झगड़ों और रिश्तों की परेशानियों को सोशल मीडिया पर लाइव आकर सार्वजनिक करने लगे हैं, जहां आधी-अधूरी…

1 year ago

“क्लासरूम से कॉर्पोरेट तक: उच्च शिक्षा और उद्योग के बीच की दूरी”

"डिग्री से दक्षता तक: शिक्षा प्रणाली को उद्योग से जोड़ने की चुनौती" "डिग्री नहीं, दक्षता चाहिए: नई अर्थव्यवस्था की नई…

1 year ago

पानी पेट और पहचान की लड़ाई ग्रामीण महिलाओं पर जलवायु की चोट

जलवायु संकट की चुप्पी में दबी औरतों की पुकार 2025 बीजिंग इंडिया रिपोर्ट के अनुसार, जलवायु परिवर्तन भारत की ग्रामीण…

1 year ago

गिलहरी और तोता: एक लघु संवाद

वट-वृक्ष की शीतल छाया में,बैठे थे दो प्राणी चुपचाप—एक चंचला चपल गिलहरी,दूजा हरा-पीला तोता आप। थाली में कुछ दाने गिरे…

1 year ago

रंगमंच पर जाति का खेल कितना जायज़?

कला का काम समाज को जागरूक करना है, उसकी विविधताओं को सम्मान देना है, और उस आईने की तरह बनना…

1 year ago

भीमराव अंबेडकर और आज विचारों का आईना या प्रतीकों का प्रदर्शन

डॉ० भीमराव अंबेडकर ने भारत को एक समतामूलक, न्यायप्रिय और जातिविहीन समाज का सपना दिखाया था। उन्होंने संविधान बनाया, शिक्षा…

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अंबेडकर जयंती विशेष

लोकतांत्रिक भारत हमारा कर्तव्य हमारी जिम्मेवारी जनतंत्र की जान सजग नागरिक और सतत भागीदारी लोकतंत्र केवल अधिकारों का मंच नहीं,…

1 year ago

सरकारी स्कूलों को बन्द करने की बजाय उनका रुतबा बढ़ाये

भारत में सरकारी स्कूल सामाजिक समानता और शिक्षा के अधिकार के प्रतीक हैं, लेकिन बजट कटौती, ढांचागत कमी और शिक्षकों…

1 year ago