अंतिम चरण के मतदान वाले संसदीय क्षेत्र के प्रत्याशियों के लिए प्रचार करना बड़ी चुनौती
उतरौला(बलरामपुर(राष्ट्र की परम्परा)। लोकसभा चुनाव की घोषणा के साथ ही सियासी गर्मी बढ़ने लगी है।उधर मौसम का पारा भी चढ़ना शुरू हो गया है इस चढ़ते हुए दोहरे पारे के बीच सीमित चुनावी खर्च सीमा में प्रत्याशियों के लिए प्रचार करना भारी पड़ सकता है।प्रत्याशियों को लग रहा है अंतिम चरण के मतदान तक पहुंचते -पहुंचते उनके पसीने छूट जाएगें।हालाकि बड़े दलों के पास चुनाव प्रचार के लिए रैलियों जनसंपर्क के लिए स्टार प्रचारकों से लेकर कार्यकर्ताओं की कमी नही है,किंतु छोटे राजनीतिक दलों और निर्दलीय प्रत्याशियों को प्रचार जनसंपर्क के लिए कार्यकर्ता जुटाना आसान नही होगा।
चुनाव की अधिसूचना जारी होते ही चुनाव प्रचार और जनसंपर्क की बहार आ जाती है।जिन राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों की घोषणा हो चुकी है उन संसदीय क्षेत्र में चुनावी रंग का परवान चढ़ गया है।घोषित प्रत्याशी कार्यकर्ताओं के साथ बैठकों का दौर शुरू करने लगे हैं।करीबी कार्यकर्ताओं का जमावड़ा संसदीय क्षेत्र में जुटने लगा है,जहां प्रत्याशियों की घोषणा नही हुई है वहां भी कुछ संभावित प्रत्याशी अपना टिकट पक्का मानकर कार्यकर्ताओं के साथ मेलजोल बढ़ाने लगे हैं।उनके संसदीय क्षेत्र में भले ही अंतिम चरण में मतदान क्यों न हो लेकिन उन्हें कार्यकर्ताओं की तलाश शुरू हो गई है।अभी से ही वे जनसंपर्क की जमीन तलाशने लगे हैं।हालाकि ऐसे मामले में बड़े राजनीतिक दल संसदीय क्षेत्रों में कुछ बड़े नेताओं के साथ जनसंपर्क अभियान प्रचार अन्य कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने में लगे रहते हैं।लेकिन कम स्टार प्रचारकों वाले छोटे दलों को तथा निर्दलीय प्रत्याशियों के सामने जनसंपर्क अभियान लंबी खींचना मुश्किल होता है।यहां तक छोटे दलों और निर्दलीय प्रत्याशियों को कार्यकर्ताओं को जुटाना और उनके साथ लंबे समय तक जनसंपर्क और चुनाव प्रचार जारी रखने में आर्थिक समस्या भी सामने आती है।सीमित चुनाव खर्च की सीमा के कारण वे अपने प्रचार अभियान को बड़े राजनीतिक दलों के मुकाबले बहुत व्यापक नही बना पाते हैं।
क्या है चुनावआयोग के दिशा निर्देश
लोकसभा प्रत्याशी 95लाख विधानसभा प्रत्याशी 40लाख रूपए से ज्यादा खर्च नही कर सकते।
चुनाव खर्च के लिए एक अकाउंट रखना होगा।
20हजार से ज्यादा राशि का भुगतान चेक के जरिए करना होगा।
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