शांत दिमाग, विस्फोटक बल्लेबाजी: ईशान किशन का नया अवतार

अनुशासन ने बदली कहानी: ईशान किशन का बड़ा खुलासा, टीम इंडिया को मिला नया मैच विनर


नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) ष्भारतीय क्रिकेट टीम के उभरते सितारे और बाएं हाथ के विस्फोटक विकेटकीपर बल्लेबाज ईशान किशन ने अपने करियर को लेकर एक बड़ा और अहम खुलासा किया है। किशन ने साफ स्वीकार किया कि उनके व्यक्तित्व में आए अनुशासन और सोच में बदलाव ने उन्हें एक बेहतर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर बनाया है। अतीत की गलतियों से सीख लेते हुए अब वह मैदान पर अधिक गंभीर, शांत और केंद्रित नजर आते हैं, जिसका सीधा फायदा उनके प्रदर्शन और टीम इंडिया को मिल रहा है।

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पिछले महीने भारतीय टीम में वापसी के बाद से ईशान किशन ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। लगातार प्रभावशाली प्रदर्शन के दम पर उन्होंने विकेटकीपर बल्लेबाज के विकल्प के तौर पर अपनी दावेदारी मजबूत कर ली है। हालिया मुकाबले में नामीबिया के खिलाफ खेली गई उनकी तूफानी पारी इसकी बड़ी मिसाल है, जहां उन्होंने महज 24 गेंदों में 61 रन ठोक दिए। इस पारी की बदौलत भारत ने पावरप्ले में एक विकेट पर 86 रन बनाते हुए टी20 विश्व कप इतिहास का अपना सर्वोच्च स्कोर दर्ज किया।
अभिषेक शर्मा की अनुपस्थिति में टीम को तेज शुरुआत दिलाते हुए किशन ने दिखा दिया कि वह बड़े मौकों के खिलाड़ी हैं। भारत की जीत के बाद उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में अपने बदले हुए रवैये पर खुलकर बात की। उन्होंने माना कि अब वह पहले की तरह हर समय मजाक नहीं करते और मैदान पर पूरा ध्यान सिर्फ खेल पर रहता है।
किशन ने कहा कि पहले उनका व्यवहार कई बार उनके करियर के आड़े आया, यहां तक कि केंद्रीय अनुबंध भी हाथ से चला गया। लेकिन उसी दौर ने उन्हें आत्ममंथन का मौका दिया। अब वह बल्लेबाजी और विकेटकीपिंग पर फोकस रखते हैं और गैरजरूरी चीजों को प्राथमिकता नहीं देते। उनके अनुसार, यही अनुशासन उन्हें मानसिक रूप से मजबूत बनाता है।
बल्लेबाजी के नजरिए से भी ईशान किशन में बड़ा बदलाव दिख रहा है। वह अब सिर्फ बड़े शॉट्स पर निर्भर नहीं रहते, बल्कि जरूरत पड़ने पर एक-दो रन लेना भी उतना ही जरूरी समझते हैं। उनका मानना है कि अच्छी गेंदों का सम्मान करना और जल्दबाजी से बचना अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सफलता की कुंजी है।
नामीबिया के खिलाफ मुकाबले में जेजे स्मिट के एक ओवर में चार छक्के जड़कर उन्होंने अपनी विस्फोटक क्षमता भी दिखाई, लेकिन इसके पीछे उनकी सोच पूरी तरह संतुलित रही। किशन का कहना है कि वह पिच पर शांत रहकर गेंद पर नजर रखते हैं और उन्हीं शॉट्स को खेलने की कोशिश करते हैं जिनमें वह सहज हैं।
अब ईशान किशन अतिरिक्त अभ्यास सत्रों के बजाय मैच की परिस्थितियों को समझने और मानसिक संतुलन बनाए रखने पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। यही वजह है कि उनका खेल पहले से ज्यादा परिपक्व और असरदार नजर आ रहा है। टीम इंडिया को उनसे आने वाले बड़े टूर्नामेंट्स में भी ऐसी ही उम्मीदें रहेंगी।

Editor CP pandey

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