1802 से 1947 तक गोरखपुर की ऐतिहासिक कड़ी पर नए शोध का आह्वान

अनछुए अभिलेख खोलेंगे स्वतंत्रता संग्राम के नए पन्ने: राष्ट्रीय संगोष्ठी में मंथन

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में “भारत के स्वतंत्रता आंदोलन की गूंज” विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र में इतिहास के अनछुए स्रोतों पर गंभीर शोध की आवश्यकता पर बल दिया गया। कार्यक्रम का आयोजन विश्वविद्यालय के मध्यकालीन एवं आधुनिक इतिहास विभाग तथा उत्तर प्रदेश राज्य अभिलेखागार के संयुक्त तत्वावधान में हुआ।
मुख्य अतिथि उच्च अध्ययन संस्थान, शिमला के निदेशक प्रोफेसर हिमांशु चतुर्वेदी ने कहा कि उत्तर प्रदेश स्टेट आर्काइव में अब भी अनेक महत्वपूर्ण फाइलें सुरक्षित हैं, जिनका व्यवस्थित अध्ययन स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े नए तथ्यों और वैकल्पिक नैरेटिव को सामने ला सकता है। उन्होंने विशेष रूप से 1802 से 1837 के बीच गोरखपुर की घटनाओं और नेपाल युद्ध के दौरान इसकी रणनीतिक भूमिका का उल्लेख किया। 1857 के संग्राम में गोरखपुर के तटीय क्षेत्र की भूमिका, राप्ती मार्ग से नेपाल पहुंचे क्रांतिकारियों तथा बंधू सिंह जैसे नायकों को इतिहास में समुचित स्थान देने की आवश्यकता जताई।

ये भी पढ़ें – Mau में सनसनी: पशु अस्पताल परिसर में बच्चे की खोपड़ी मिलने से हड़कंप

उन्होंने कहा कि 1802 से 1947 तक गोरखपुर केंद्रित अध्ययन में एक क्रमबद्ध ऐतिहासिक कड़ी दिखाई देती है, लेकिन समग्र रूप में इसका इतिहास अभी सामने नहीं आ पाया है। शचिंद्रनाथ सान्याल के क्रांतिकारी नेटवर्क, विशेषकर कोलकाता के आंदोलन से उनके संबंधों पर भी गहन शोध अपेक्षित है। इतिहास लेखन में केवल पश्चिमी शोध प्रविधियों पर निर्भर रहने के बजाय स्थानीय परिस्थितियों और स्रोतों पर आधारित दृष्टिकोण विकसित करने की जरूरत बताई गई।
गीता प्रेस पर लिखित एक पुस्तक का संदर्भ देते हुए उन्होंने इतिहास की व्याख्या में तथ्यपरकता और संतुलन की आवश्यकता रेखांकित की। भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद द्वारा गीता प्रेस और हनुमान प्रसाद पोद्दार पर किए जा रहे शोध को भी महत्वपूर्ण बताया।

ये भी पढ़ें – पंचायत मतदाता सूची पुनरीक्षण में लापरवाही पर प्रशासन की कड़ी कार्रवाई

अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रोफेसर पूनम टंडन ने स्वतंत्रता संग्राम से संबंधित अभिलेखीय प्रदर्शनी को उपयोगी बताते हुए विद्यार्थियों और नगर समाज से इसका अवलोकन करने की अपील की। इतिहास संकलन के राष्ट्रीय संगठन मंत्री डॉ. बालमुकुंद पांडेय ने कहा कि उत्तर प्रदेश में अंग्रेजों के प्रवेश के साथ ही प्रतिरोध शुरू हो गया था और 1947 तक जारी रहा। उन्होंने माइक्रो-इतिहास लेखन के माध्यम से गुमनाम नायकों को मुख्यधारा में लाने पर बल दिया।
प्रोफेसर अरुप चक्रवर्ती ने 1857 में लखनऊ की घटनाओं का उल्लेख करते हुए इतिहास लेखन में समग्रता और न्यायपूर्ण दृष्टिकोण अपनाने की बात कही। परिषद के सदस्य सचिव ओमजी उपाध्याय ने काकोरी के शहीदों और हिंदी साहित्य में निहित राष्ट्रीय चेतना पर प्रकाश डाला।
अतिथियों का स्वागत प्रोफेसर मनोज कुमार तिवारी ने किया, संचालन डॉ. सर्वेश शुक्ला ने तथा आभार डॉ. आशीष कुमार सिंह ने व्यक्त किया। कार्यक्रम में देशभर से आए इतिहासविद, शिक्षक, शोधार्थी और छात्र-छात्राओं की उपस्थिति रही।

ये भी पढ़ें –थाना खुखुन्दू में पुलिस अधीक्षक की सख्ती, रिकॉर्ड और कानून-व्यवस्था की गहन समीक्षा

राष्ट्रीय संगोष्ठी का द्वितीय सत्र
इसी क्रम में संगोष्ठी का द्वितीय सत्र प्रोफेसर एस. एन. चौबे, अध्यक्ष, इतिहास विभाग, सिद्धार्थ विश्वविद्यालय की अध्यक्षता में आयोजित हुआ। इस सत्र में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, इलाहाबाद विश्वविद्यालय तथा दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के शोधार्थियों ने विभिन्न विषयों पर शोधपत्र प्रस्तुत किए।
अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रोफेसर एस. एन. चौबे ने इतिहास लेखन में चौरी-चौरा प्रसंग को रेखांकित करते हुए व्यापक सांस्कृतिक इतिहास लेखन पर बल दिया। गोरखपुर विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र एवं जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर ईस्ट एशियन स्टडीज के प्रोफेसर हृदय नारायण ने संयुक्त आयोजन की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए भविष्य में भी दोनों विश्वविद्यालयों के संयुक्त तत्वावधान में ऐसे कार्यक्रम आयोजित करने की बात कही।
प्रोफेसर राजेश नायक, जयप्रकाश विश्वविद्यालय, छपरा ने कहा कि इतिहास लेखन में केवल आधिकारिक अभिलेख ही नहीं, बल्कि वैकल्पिक एवं परंपरागत स्रोत भी समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने मौखिक इतिहास, लोक परंपराओं और साहित्यिक स्रोतों को इतिहास लेखन में समाहित करने पर जोर दिया।
द्वितीय सत्र का संचालन इतिहास विभाग की सहायक आचार्य डॉ. सुनीता ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. श्वेता ने व्यक्त किया।

Editor CP pandey

Recent Posts

10 अप्रैल से तीन पालियों में होंगी सम सेमेस्टर परीक्षाएं

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में सत्र 2025-26 के अंतर्गत सेमेस्टर प्रणाली…

23 seconds ago

भारतीय जनता पार्टी के 47वें स्थापना दिवस पर सेवा, समर्पण और राष्ट्र प्रथम का संकल्प दोहराया

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। भारतीय जनता पार्टी के 47वें स्थापना दिवस के अवसर…

10 minutes ago

बलिया जनपद में किसानों के हित में चलाए जा रहे फॉर्मर रजिस्ट्री अभियान

बलिया (राष्ट्र की परम्परा) जनपद में किसानों के हित में चलाए जा रहे फॉर्मर रजिस्ट्री…

1 hour ago

आंगनबाड़ी सहायिका चयन में पारदर्शिता बढ़ाने की पहल, 152 अभ्यर्थिनियां पात्

बलिया(राष्ट्र की परम्परा) जिले में आंगनबाड़ी सहायिका के रिक्त पदों पर चल रही चयन प्रक्रिया…

1 hour ago

सीसी रोड निर्माण में लापरवाही, पांच दिनों से रास्ता बंद, राहगीर परेशान

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। जिले के सेमरियावां ब्लॉक क्षेत्र के बूधा खुर्द चौराहे…

1 hour ago

झोपड़ी पर बुलडोज़र लेकिन मॉल पर खामोशी क्यों?- डॉ सत्यवान सौरभ

हरियाणा (राष्ट्र की परम्परा)भारत के शहरों में अतिक्रमण कोई नई समस्या नहीं है, लेकिन जिस…

3 hours ago