कैलाश सिंह
महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। किसी भी राष्ट्र का भविष्य उसकी आने वाली पीढ़ी पर निर्भर करता है और उस पीढ़ी की बुनियाद शिक्षा से ही रखी जाती है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा केवल डिग्री या रोजगार तक सीमित नहीं होती, बल्कि यह व्यक्ति के व्यक्तित्व, सोच, नैतिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारियों का समग्र विकास करती है। जब शिक्षा मजबूत होती है, तभी एक सशक्त, जागरूक और जिम्मेदार पीढ़ी का निर्माण संभव हो पाता है।
आज के दौर में यह प्रश्न अत्यंत महत्वपूर्ण हो गया है कि क्या हमारी वर्तमान शिक्षा व्यवस्था वास्तव में सशक्त पीढ़ी तैयार कर पा रही है। शिक्षा का बड़ा हिस्सा अब अंकों, परीक्षाओं और प्रतिस्पर्धा तक सीमित होता जा रहा है, जिसके कारण रचनात्मकता, नवाचार और नैतिक मूल्यों पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा पा रहा है। यह स्थिति न केवल शिक्षा व्यवस्था के लिए बल्कि देश के भविष्य के लिए भी चिंताजनक है।
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का वास्तविक अर्थ
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा वह है जो छात्र को केवल किताबी ज्ञान ही नहीं, बल्कि व्यवहारिक कौशल, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, नैतिक मूल्य और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना भी प्रदान करे। ऐसी शिक्षा युवाओं को आत्मनिर्भर बनाती है, उनमें निर्णय लेने की क्षमता विकसित करती है और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ती है।
ग्रामीण-शहरी शिक्षा अंतर बड़ी चुनौती
देश में आज भी ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच शिक्षा की गुणवत्ता में गहरी खाई मौजूद है। ग्रामीण इलाकों में आधारभूत सुविधाओं की कमी, प्रशिक्षित शिक्षकों का अभाव और आधुनिक तकनीक तक सीमित पहुंच शिक्षा के स्तर को प्रभावित कर रही है। यदि शिक्षा सभी के लिए समान, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण नहीं होगी, तो सशक्त पीढ़ी का सपना अधूरा ही रह जाएगा।
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नई शिक्षा नीति और डिजिटल शिक्षा की भूमिका
नई शिक्षा नीति, डिजिटल शिक्षा, ऑनलाइन कक्षाएं और स्मार्ट क्लास जैसे प्रयासों ने शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा दी है। तकनीकी संसाधनों ने सीखने के नए अवसर उपलब्ध कराए हैं, लेकिन इन योजनाओं की सफलता प्रभावी और ईमानदार क्रियान्वयन पर निर्भर करती है।
शिक्षक की भूमिका सबसे अहम
शिक्षक केवल विषय पढ़ाने वाला नहीं, बल्कि छात्र के चरित्र, सोच और भविष्य को गढ़ने वाला मार्गदर्शक होता है। शिक्षक का सम्मान, निरंतर प्रशिक्षण और संसाधनों से सशक्तिकरण गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की अनिवार्य शर्त है। जब शिक्षक सशक्त होगा, तभी छात्र और समाज सशक्त बनेंगे।
राष्ट्र निर्माण की नींव है गुणवत्तापूर्ण शिक्षा
स्पष्ट है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा केवल व्यक्तिगत विकास का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है। समाज, सरकार और शिक्षण संस्थानों को मिलकर शिक्षा की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देना होगा, तभी एक सशक्त पीढ़ी तैयार होगी और देश सच्चे अर्थों में प्रगति के पथ पर अग्रसर हो सकेगा।
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