लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) मध्यांचल विद्युत वितरण निगम में संविदा कर्मियों की तैनाती को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया है कि निगम के 251 संविदा बिजली कर्मी उपकेंद्रों पर कार्यरत दिखाए गए हैं, जबकि वास्तव में वे विभिन्न अफसरों के घरों में निजी सेवा कर रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार इन कर्मियों को कुशल और अकुशल श्रेणी में दर्शाकर उपकेंद्रों पर तैनाती दर्ज की गई, मगर वास्तविकता में वे JE, SDO, AE, EE, SE से लेकर मुख्य अभियंताओं के आवासों पर तैनात हैं। यह फर्जीवाड़ा महीनों से चल रहा था, जिसकी आड़ में हर माह लगभग 25.10 लाख रुपये का वेतन विद्युत विभाग से जारी किया जा रहा था।
संविदा कर्मियों के संघ ने इस पूरे मामले की सूची निगम अध्यक्ष को सौंप दी है। अध्यक्ष आशीष गोयल ने खुलासे को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों और एजेंसी को तलब किया है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मामले में बड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई हो सकती है।
👉 इस घोटाले से न केवल विभागीय राजस्व को नुकसान हुआ है, बल्कि उपभोक्ताओं को दी जाने वाली विद्युत सेवाओं पर भी सीधा असर पड़ा है।
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