बौलिया पोखरा सुंदरीकरण को मिली मंजूरी, 48 लाख से संवरेगा ऐतिहासिक जलस्रोत


महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)।बृजमनगंज नगर पंचायत क्षेत्र के सहजनवां बाबू रोड स्थित वार्ड संख्या–2 में अवस्थित प्राचीन बौलिया पोखरा अब एक नई पहचान की ओर अग्रसर है। शासन की ओर से बौलिया पोखरा सुंदरीकरण के लिए 48 लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत होने के बाद नगर क्षेत्र में खुशी और उत्साह का माहौल है। वर्षों से उपेक्षित इस ऐतिहासिक जलस्रोत को अब उसका पुराना गौरव लौटाने की दिशा में ठोस पहल शुरू हो गई है।
बौलिया पोखरा केवल एक जलाशय नहीं, बल्कि नगर की धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विरासत का अहम हिस्सा रहा है। पारंपरिक विवाह संस्कार, धार्मिक अनुष्ठान और लोक परंपराएं इस पोखरे से जुड़ी रही हैं। पीढ़ियों से यह स्थान नगरवासियों की आस्था और सामूहिक स्मृतियों का केंद्र रहा है।
अतिक्रमण और उपेक्षा से बिगड़ चुकी थी स्थिति
पिछले कई वर्षों से अवैध कब्जे, नियमित सफाई के अभाव और प्रशासनिक उपेक्षा के कारण बौलिया पोखरा का स्वरूप लगातार बिगड़ता चला गया। जलभराव, गंदगी और संकुचन के चलते यह ऐतिहासिक धरोहर अपने अस्तित्व के संकट से जूझ रही थी। स्थानीय नागरिक लंबे समय से बौलिया पोखरा सुंदरीकरण की मांग उठाते आ रहे थे।
शासन की स्वीकृति के बाद शुरू होगी विकास प्रक्रिया

नगर पंचायत की अधिशासी अधिकारी सुरभि मिश्रा द्वारा किए गए स्थलीय निरीक्षण के बाद पोखरे के विकास का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था, जिसे अब स्वीकृति मिल चुकी है। स्वीकृत बजट से पोखरे का समग्र सौंदर्यीकरण, जलसंरक्षण, सफाई, पाथवे और पर्यावरण अनुकूल विकास कार्य कराए जाएंगे।
पर्यावरण और संस्कृति दोनों को मिलेगा लाभ
अधिशासी अधिकारी ने बताया कि बौलिया पोखरा सुंदरीकरण से न केवल पर्यावरण संतुलन को मजबूती मिलेगी, बल्कि नगर की सुंदरता भी बढ़ेगी। यह स्थल भविष्य में धार्मिक, सामाजिक आयोजनों और नागरिक सहभागिता का प्रमुख केंद्र बनेगा, जिससे आदर्श नगर की अवधारणा को बल मिलेगा।
निरीक्षण के दौरान सभासद जितेंद्र कुमार, इसरार अहमद, कासिम खान, दीपक विश्वकर्मा सहित कई गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। सभी ने इस निर्णय को नगर विकास की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया। नागरिकों का मानना है कि यह पहल आने वाली पीढ़ियों के लिए एक अमूल्य धरोहर सिद्ध होगी।
अब नगरवासियों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि बौलिया पोखरा सुंदरीकरण का कार्य समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरा हो, ताकि वर्षों से उपेक्षित यह ऐतिहासिक जलस्रोत फिर से अपनी पहचान और गरिमा प्राप्त कर सके।

Editor CP pandey

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