बैंक ऑफ महाराष्ट्र का लोन 17% बढ़ा; सरकारी बैंकों की पूंजी निजी बैंकों से बेहतर प्रदर्शन कर रही है

मुंबई (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। बैंक ऑफ महाराष्ट्र ने चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में अपने लोन पोर्टफोलियो में 16.8% की वृद्धि दर्ज की है। सितंबर 2024 तक बैंक का लोन आकार 2.17 लाख करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 2.54 लाख करोड़ रुपये हो गया है। जमा राशि भी 12.1% बढ़कर 3.09 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है।

सरकारी बैंकों की पूंजी में बढ़ोतरी, निजी बैंकों में गिरावट

वैश्विक आर्थिक अस्थिरता के बीच सरकारी बैंकों की पूंजी मजबूत बनी हुई है। जुलाई-सितंबर तिमाही में सरकारी बैंकों के बाजार पूंजीकरण में इजाफा हुआ है, जबकि निजी बैंकों में गिरावट दर्ज की गई।

एसएंडपी ग्लोबल के आंकड़ों के अनुसार:

एचडीएफसी बैंक की पूंजी में 4.8% गिरावट

आईसीआईसीआई बैंक की पूंजी में 6.7% गिरावट

कोटक महिंद्रा बैंक, एक्सिस बैंक और इंडसइंड बैंक में भी गिरावट

इंडसइंड बैंक का बाजार पूंजीकरण सबसे अधिक 15.7% घटा

वहीं, सरकारी बैंकों में:

एसबीआई की पूंजी में 10% वृद्धि

बैंक ऑफ बड़ौदा में 3.9% वृद्धि

पंजाब नेशनल बैंक में 2.1% वृद्धि

सेवा क्षेत्र की वृद्धि दर में गिरावट

सेवा क्षेत्र में गतिविधियों की धीमी गति के कारण सेवा क्षेत्र का पीएमआई सितंबर में घटकर 60.9 हो गया, जो अगस्त में 62.9 था। एचएसबीसी इंडिया के मुख्य अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी के अनुसार, यह गिरावट सामान्य है और सेवाओं में विकास की गति में कोई बड़ी मंदी का संकेत नहीं देती।

सेवा निर्यात में वृद्धि

नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, भारत का सेवा निर्यात सालाना आधार पर 14% बढ़कर 102 अरब डॉलर हो गया है। इसी दौरान, आयात 4.2% बढ़कर 48 अरब डॉलर तक पहुंचा। 2024-25 में कुल व्यापार 1.73 लाख करोड़ डॉलर रहा, जिसमें 823 अरब डॉलर का निर्यात और 908 अरब डॉलर का आयात शामिल है। प्रमुख निर्यात श्रेणियों में मिनरल फ्यूल, इलेक्ट्रिकल मशीनरी और न्यूक्लियर रिएक्टर शामिल हैं।

सेबी ने सोशल मीडिया से हटाई 1 लाख से अधिक सामग्री

सेबी ने पिछले 18 महीनों में गूगल, मेटा और अन्य प्लेटफॉर्म से 1 लाख से अधिक गैरकानूनी निवेश सामग्री हटाई है। सेबी चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने कहा कि तकनीकी प्लेटफॉर्म निवेशकों को धोखा देने वाली सामग्री के लिए इस्तेमाल हो रहे हैं। उन्होंने निवेशकों को सतर्क रहने की चेतावनी दी और कहा कि केवल 36% लोगों को पूंजी बाजार की पर्याप्त जानकारी है।

जन औषधि नीति में बदलाव की संभावना

जन औषधि केंद्रों के खुदरा विक्रेताओं ने सरकार से “शून्य दूरी नीति” की समीक्षा की मांग की है। यदि नीति में बदलाव होता है, तो नजदीक की दुकानें नहीं खोली जा सकेंगी और तय दूरी पर ही नई दुकानें खुलेंगी। 11 जून 2025 तक देश में 16,000 से अधिक जन औषधि केंद्र काम कर रहे हैं।

Karan Pandey

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