बलिया(राष्ट्र की परम्परा)
विश्व के लिए अत्यंत चिंताजनक और निंदनीय विषय है कि बांग्लादेश में निरंतर हिंदू समुदाय के लोगों पर अत्याचार और हत्याओं की घटनाएं सामने आ रही हैं। यह केवल किसी एक धर्म या समुदाय का प्रश्न नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता के अस्तित्व और मूल्यों पर गंभीर आघात है। किसी भी सभ्य समाज में हिंसा, हत्या और अत्याचार को कभी स्वीकार नहीं किया जा सकता। दुनिया का कोई भी धर्म या मजहब हिंसा को समर्थन नहीं देता। पैगम्बर मुहम्मद साहब ने मानवता, करुणा और भाईचारे का संदेश दिया, प्रभु ईसा मसीह ने प्रेम और क्षमा को सर्वोपरि बताया, वहीं भगवान बुद्ध ने अहिंसा और करुणा को जीवन का मूल सिद्धांत माना। इन महान विभूतियों की शिक्षाएं स्पष्ट करती हैं कि हैवानियत और निर्दयता का किसी भी धर्म से कोई संबंध नहीं हो सकता। इसके बावजूद जब किसी देश में अल्पसंख्यकों को केवल उनकी आस्था के कारण निशाना बनाया जाता है, तो यह मानव सभ्यता के लिए शर्मनाक स्थिति बन जाती है।
आज आवश्यकता है कि विश्व के सभी राष्ट्र, अंतरराष्ट्रीय संगठन और मानवाधिकार संस्थाएं इस विषय को गंभीरता से संज्ञान में लें। किसी भी देश में अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचार और हत्याओं को नजरअंदाज करना अपराध के समान है। दोषी देशों और जिम्मेदार तत्वों के विरुद्ध कड़ी से कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए, जिससे भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो हिंसा करने वाले तत्वों के हौसले और बुलंद होंगे। इसलिए विश्व समुदाय को एकजुट होकर यह संदेश देना होगा कि अत्याचार और हत्या को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
— साहित्यकार डॉ. गया शंकर ‘प्रेमी’
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