जिसके शब्दों में ऐसा प्रेम भरा,
उसमे ख़ुद कितना प्रेम भरा होगा,
जिसकी बातें ही इतनी सुंदर हैं,
उसके भावों में कैसा प्रेम भरा होगा।
जो अपना नहीं हो सका कभी,
वह किसी और का कैसे होगा,
जो अपने को सुख नही दे सका,
किसी और को सुख कैसे देगा।
इसके पूर्व कि दूसरों को प्रेम करो,
अपने स्वयं से प्रेम करना ज़रूरी है,
दूसरों के जीवन में सुख ला सको,
अपने जीवन में सुख बयार ले आओ।
किसी दूसरे के अंधेरे जीवन में
प्रकाश की किरण उतार सको,
कम से कम अपने अंधेरे जीवन
में तो प्रकाश आमंत्रित कर लो!
हर नये दिन, नव उमंग के साथ
आदित्य जीवन के आनंद लेने हैं,
नव नूतन अवसर प्रदान करने हैं,
ज्ञानार्जन की यह अद्भुत बातें हैं।
कर्नल आदि शंकर मिश्र ‘आदित्य’
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