वोटर लिस्ट से नाम हटाने का आरोप: सपा ने बीजेपी पर साधा निशाना, मेंहदावल में सियासी घमासान

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। संत कबीर नगर जिले की मेंहदावल विधानसभा क्षेत्र में वोटर लिस्ट से नाम हटाने का आरोप लगाते हुए समाजवादी पार्टी (सपा) ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। चुनावी माहौल के बीच सामने आए इस मुद्दे ने जिले की राजनीति को गरमा दिया है। सपा का दावा है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया की आड़ में मुस्लिम और दलित मतदाताओं के नाम जानबूझकर वोटर लिस्ट से हटाए जा रहे हैं, जिससे लोकतांत्रिक अधिकारों पर सीधा प्रहार हो रहा है।
सपा के पूर्व विधानसभा प्रत्याशी जयराम पाण्डेय के नेतृत्व में बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ताओं ने मेंहदावल तहसील और जिलाधिकारी कार्यालय पर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) वर्ग के मतदाताओं को योजनाबद्ध तरीके से मतदान के अधिकार से वंचित किया जा रहा है। पार्टी नेताओं के अनुसार, यह पूरी प्रक्रिया राजनीतिक दबाव और प्रशासनिक मिलीभगत का परिणाम है।

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जयराम पाण्डेय ने जिलाधिकारी को सौंपे गए ज्ञापन में आरोप लगाया कि फॉर्म-7 का गलत इस्तेमाल कर कई मतदाताओं के नाम बिना जानकारी दिए सूची से काट दिए गए। उन्होंने कहा कि गोईठहां, बनेथू और पोखर भिटवा जैसे गांवों में प्रभावशाली लोग बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) पर दबाव बनाकर फॉर्म-7 पर जबरन हस्ताक्षर करवा रहे हैं। सपा का कहना है कि यह लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने की साजिश है और यदि दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो पार्टी व्यापक आंदोलन छेड़ेगी।

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दूसरी ओर, बीजेपी के सहयोगी दल निषाद पार्टी के स्थानीय विधायक अनिल त्रिपाठी ने सपा के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने कहा कि वोटर लिस्ट से नाम हटाने का आरोप पूरी तरह राजनीति से प्रेरित है। विधायक के अनुसार, SIR अभियान के तहत फॉर्म-6 के माध्यम से नए मतदाताओं के नाम जोड़े जा रहे हैं, जबकि फॉर्म-7 के जरिए आपत्ति दर्ज कराना प्रत्येक नागरिक का वैधानिक अधिकार है। इसे किसी साजिश से जोड़ना गलत और भ्रामक है।
जिला प्रशासन ने पूरे मामले में निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया है। अधिकारियों का कहना है कि यदि कहीं भी नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, वोटर लिस्ट से नाम हटाने का आरोप जिले में चर्चा का केंद्र बना हुआ है और सभी की निगाहें प्रशासनिक जांच पर टिकी हैं।

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यह मामला न केवल स्थानीय राजनीति बल्कि आगामी चुनावों की पारदर्शिता से भी जुड़ा है। ऐसे में मतदाता सूची से जुड़े हर कदम पर प्रशासन और चुनाव आयोग की भूमिका बेहद अहम मानी जा रही है।

Editor CP pandey

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