राजेंद्र यादव ने प्रेस वार्ता में लगाए गंभीर आरोप
गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)
गोरखपुर जर्नलिस्ट प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान जंगल सिकरी थाना खोराबार निवासी राजेंद्र यादव ने पुलिस और एक स्थानीय व्यक्ति पर गंभीर आरोप लगाए। राजेंद्र यादव ने बताया कि 17 जनवरी 2026 को दोपहर 2 बजकर 45 मिनट पर खोराबार थाने की गाड़ी से आए पुलिसकर्मियों ने उन्हें घर के बाहर से अपहरण के तरीके से उठा लिया और बेलवार चौकी ले जाकर बंधक बनाकर रखा।
राजेंद्र यादव के अनुसार, उन्हें बिना किसी लिखित सूचना या कारण बताए चौकी पर रखा गया। लगभग शाम 4 बजे थानाध्यक्ष इत्यानंद (खोराबार) वहां पहुंचे और उन पर दबाव बनाने लगे कि वे जंगल सिकरी केसरवानी पेट्रोल पंप के पास स्थित 32 डिसमिल जमीन को होशिला सिंह के नाम रजिस्ट्री कर दें। उन्होंने आरोप लगाया कि यह दबाव लगातार तीन दिनों तक बनाया जाता रहा।
राजेंद्र यादव ने बताया कि 18 जनवरी 2026 को होशिला सिंह स्वयं भी चौकी पर पहुंचे और खुलेआम धमकी दी कि यदि जमीन की रजिस्ट्री नहीं की गई तो पुलिस उनके साथ वही करेगी, जैसा वे चाहेंगे। राजेंद्र के अनुसार, उनसे कहा गया कि जब तक जमीन की रजिस्ट्री नहीं होगी, तब तक पुलिस उन्हें अपने कब्जे में रखेगी।
प्रेस वार्ता में राजेंद्र यादव ने एक बेहद संवेदनशील आरोप लगाते हुए कहा कि नवंबर 2025 में उनके बड़े भाई राजनाथ यादव ने आत्महत्या कर ली थी, और यह कदम उन्होंने होशिला सिंह के कथित दबाव में उठाया था। राजेंद्र ने दावा किया कि चौकी पर उनसे कहा गया कि जैसे उनके भाई को मजबूर किया गया, वैसे ही उन्हें भी किया जा सकता है।
राजेंद्र यादव ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों द्वारा यह कहा गया कि प्रदेश में एनकाउंटर अभियान चल रहा है और जरूरत पड़ी तो उनका भी एनकाउंटर कर दिया जाएगा। उनका कहना है कि जमीन दिलवाने के लिए पुलिस द्वारा अपहरण कर बंधक बनाए रखने जैसी कार्रवाई की गई, जो कानून के खिलाफ है।
उन्होंने बताया कि जब परिजन राजेंद्र को खोजते हुए थानों में पहुंचे तो थानेदार ने यह कहकर इंकार कर दिया कि राजेंद्र को पुलिस नहीं लाई है। परिजन तीन दिनों तक शहरी क्षेत्र में अलग-अलग जगह भटकते रहे, लेकिन कोई जानकारी नहीं दी गई।
राजेंद्र यादव के अनुसार, जब यह मामला एडीजी जोन मुथा अशोक जैन और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक राज करन नय्यर के संज्ञान में आया, तब तीन दिन बाद उन्हें खोराबार थाने से छोड़ा गया और परिजनों को सुपुर्द किया गया। इस पर उन्होंने दोनों अधिकारियों का धन्यवाद भी किया।
प्रेस वार्ता में राजेंद्र यादव ने सवाल उठाया कि
क्या थानाध्यक्ष ने उन्हें बिना किसी केस के तीन दिनों तक हिरासत में रखा?
क्या इसकी जानकारी उच्च अधिकारियों को दी गई थी या नहीं?
क्या पुलिस किसी निजी व्यक्ति के दबाव में आकर जमीन रजिस्ट्री कराने के लिए इस तरह की कार्रवाई कर सकती है?
राजेंद्र यादव ने यह आशंका भी जताई कि 32 डिसमिल पुस्तैनी जमीन को लेकर होशिला सिंह से उन्हें जान का खतरा बना हुआ है और कभी भी उनकी हत्या कराई जा सकती है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।
प्रेस वार्ता के बाद यह मामला जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है और पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
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