टीके से लैस होंगे सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र

दो दिवसीय कार्यशाला में प्रशिक्षित हुए स्वास्थ्य कर्मी

बहराइच(राष्ट्र की परम्परा) सीएमओ सभागार में बैठक कुत्ता,बंदर,बिल्ली या अन्य स्तनधारी जानवरों के काटने से रैबीज होने का खतरा रहता है । इससे बचने के लिए जानवर काटने वाले दिन ही एन्टी रैबीज का टीका लगवाना चाहिए। यह टीके जिला मुख्यालय सहित ब्लॉक सीएचसी पर ही लगते थे। लेकिन अब इसकी सुविधा जनपद के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर भी की गयी है। यहां प्रतिदिन टीके उपलब्ध रहेंगे ।
यह बातें सीएमओ सभागार में आयोजित चिकित्साधिकारी व स्वास्थ्य कर्मियों की दो दिवसीय रैबीज टीकाकारण प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान एसीएमओ डॉ संतोष राणा ने कही। उन्होंने बताया कि जानवर काटने के बाद घाव पर हल्दी,मिर्चा या चूना जैसी कोई भी चीज न लगाएँ । इससे रैबीज वायरस अधिक अंदर तक चले जाने का खतरा होता है । घाव वाली जगह को कस कर न बांधे और जितनी जल्दी हो सके एन्टी रैबीज का टीका लगवाएँ। घाव अधिक होने पर एन्टी रैबीज क्लीनिक से इलाज करवाएँ। इसकी सुविधा जिला अस्पताल सहित सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर उपलब्ध है। सरकार का प्रयास है कि वर्ष 2030 तक जानवर के काटने से होने वाले रैबीज मृत्यु शून्य हो जाय ।
जानवर काटने के तुरंत बाद क्या करें डिस्ट्रिक्ट एपिडेमियोलोजिस्ट डॉ0 निर्मेष श्रीवास्तव ने बताया कि सबसे पहले बहते हुए पानी से घाव को साबुन पानी की झाग से अच्छी तरह 15 मिनट तक धुलना चाहिए । इस दौरान यदि थोड़ा खून बह रहा है तो इसकी चिंता न करें । वयस्क होने की स्थिति में घाव को खुद ही धुलना चाहिए वहीं बच्चे की स्थिति में रबड़ के दस्ताने पहनकर घर का कोई भी सदस्य घाव धुल सकता है। उन्होंने बताया घाव धुलने के बाद उसी दिन एन्टी रैबीज का पहला टीका नजदीकी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से लगवाना चाहिए। ऐसा करने से शत प्रतिशत रैबीज से बचा जा सकता है।
लाइलाज है रैबीज अवश्य लगवाएँ टीका डॉ0 निर्मेष ने बताया कि घर की चुहिया को छोड़कर बाकी सभी चार पैर वाले स्तनधारी जानवर के काटने पर रैबीज होने का खतरा रहता है। आमतौर पर इसके लक्षण 3 से लेकर 10 दिन में प्रकट हो जाते हैं लेकिन कभी-कभी 6 से 14 साल तक का वक्त भी लग जाता है। इसलिए कुत्ता,बंदर,बिल्ली,गाय,भैंस,घोड़ा, गधा,कोई भी शाकाहारी या मांसाहारी जानवर चाहे वह स्वस्थ हो या पागल हो काटने वाले दिन ही एन्टी रैबीज का पहला टीका अवश्य लगवाना चाहिए। क्योंकि एक बार रैबीज होने के बाद इसका कोई इलाज नहीं है । जानवर का दूध पीने से नहीं होता रैबीज डाक्टर श्रीवास्तव ने बताया यदि किसी दुधारू जानवर को किसी पागल कुत्ते ने काट लिया है तो उस जानवर का दूध पीने से रैबीज नहीं फैलता। इसलिए ऐसे जानवर का दूध पीने के बाद टीका लगवाने की आवश्यकता नहीं होती।

Editor CP pandey

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