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अहिल्याबाई के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता : दयाशंकर

मऊ( राष्ट्र की परम्परा )पालिका कम्युनिटी हाल में देवी अहिल्याबाई होल्कर की त्रिशताब्दी जयंती स्मृति अभियान पर गोष्ठी का आयोजन किया गया।
उत्तर प्रदेश सरकार में परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रहे।
परिवहन मंत्री ने अहिल्याबाई को धर्म, न्याय और राष्ट्रधर्म का सजीव स्वरूप बताया तथा कहा कि अहिल्याबाई का जन्म 31 मई 1725 को महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के चांडी गांव में हुआ। उनके पिता मैंकोजी शिंदे मराठा साम्राज्य में पाटिल थे। विवाह के बाद वह मालवा राज्य की बहू बनीं और बाद में महारानी।
उनका जीवन चुनौतियों से भरा रहा। पति खंडेराव की युद्ध में मृत्यु हुई। फिर ससुर मल्हाराव का निधन हुआ। इकलौते पुत्र माले राव की भी असामयिक मृत्यु हो गई। 11 दिसंबर 1767 को उन्हें राज्याभिषेक कर सिंहासन सौंपा गया।
अहिल्याबाई ने विदेशी आक्रमणों के दौर में काशी से रामेश्वरम तक अनेक तीर्थस्थलों का जीर्णोद्धार कराया। उन्होंने देशभर में मंदिर, धर्मशालाएं और घाट बनवाए। काशी, गया, सोमनाथ, द्वारिका और रामेश्वरम में उनके कार्य विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं।

भाजपा जिलाध्यक्ष रामाश्रय मौर्य ने कहा कि वह कुशल प्रशासक थीं। स्वयं लगान वसूली, न्याय और प्रजा की समस्याओं का समाधान करती थीं। राजकोष को जनता का धन मानती थीं। सैनिक रणनीति में भी निपुण थीं। उनकी प्रशासनिक दक्षता और दूरदर्शिता ने राज्य को समृद्धि की ओर अग्रसर किया।

इस अवसर पर गणेश सिंह अशोक सिंह संजय पांडेय संगीता द्विवेदी कृष्ण कांत राय सुनील यादव राघवेंद्र शर्मा धर्मेंद्र राय देवेश राय विनोद गुप्ता सहित सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।

rkpnews@somnath

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