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अहिल्याबाई होलकर त्याग व बलिदान की प्रतिमूर्ति थी – कमलेश पासवान

उनके आदर्शों पर चल कर ही महिला सशक्तिकरण को चरितार्थ कर सकते है-श्वेता जायसवाल

बरहज/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)
नगर स्थित समृद्धि मैरिज हॉल में नगरपालिका अध्यक्ष की अध्यक्षता में अहिल्याबाई होलकर की 300 वी जन्मदिन धूमधाम से आयोजित किया गया, जिसके मुख्य अतिथि केंद्रीय ग्रामीण राज्य मंत्री कमलेश पासवान रहे। कार्यक्रम के दौरान मुख्यातिथि ग्रामीण राज्य मंत्री एवं संयोजक एडवोकेट संजय सिंह के द्वारा मां सरस्वती की चित्र पर पुष्प अर्पित कर कार्यक्रम का भव्य शुभारंभ किया गया।
अहिल्याबाई होलकर की जयंती के अवसर पर केंद्रीय ग्रामीण राज्य मंत्री कमलेश पासवान ने कहा कि, अहिल्याबाई होलकर ने समाज को एक दिशा देने का कार्य कर देश की एक नई पहचान बनाई थी। उनकी शादी 12 वर्ष की अल्प अवस्था में ही हो गई थी । होलकर वंश की महारानी अहिल्याबाई होलकर की आज 300 वी जयंती पूरे देश मे श्रद्धा के साथ मनाई जा रही हैं। जब देश में सती होने की कुप्रथा हुआ करती थी, उस दौर में अहिल्याबाई होलकर ने होलकर वंश की कमान संभाली। कहा जाता है कि उन्होंने अपनी प्रजा को अपनी संतान से भी ज्यादा प्यार किया। न्याय की देवी बनी अहिल्याबाई ने अपने बेटे की एक गलती के लिए उसे मौत की सजा सुना दी। उन्हें लोग लोकमाता कहकर संबोधित करते थे। उनका सादगीपूर्ण जीवन, धर्म, संस्कृति और राष्ट्र के लिए समर्पित रहा। उन्हें द फिलॉसफर क्वीन की उपाधि दी गई। शिव भक्ति के अलावा नित्य नर्मदा दर्शन व मछलियों को दाना खिलाना व गरीबों को दान देना उनकी दिनचर्या में शामिल था। अहिल्याबाई ने महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए भी काफी काम किया। उन्होंने महिलाओं के संपत्ति का अधिकार दिया, साथ ही उन्हें सशक्त बनाने के लिए अस्त्र और शस्त्र की शिक्षा भी दी। इसी क्रम में
नगरपालिका अध्यक्ष श्वेता जायसवाल ने कहा कि उस दौर में मराठा सैनिकों के परिवार की महिलाओं को कुछ सैन्य प्रशिक्षण देकर आत्मरक्षा का अभ्यास कराया जाता था। इसका कारण यह था कि जब गांव के युवा सैन्य अभियान पर होते तब योजना पूर्वक असामाजिक तत्व गांव पर धावा बोल देते थे। सीमा के गांवों को लूट के साथ महिलाओं को भी निशाना बनाया जाता था। इसलिये शिवाजी महाराज ने सैन्य परिवारों की महिलाओं और गांव की बेटियों को आत्मरक्षा के लिये शारीरिक सामर्थ्य बढ़ाना और कुछ शस्त्र प्रशिक्षण देना शुरू किया था। अहिल्याबाई अपनी माता के साथ तीर कमान और भाला चलाना सीख गई थीं। माता सुशीला बाई शिवभक्त थीं, जिसके कारण अहिल्याबाई भी शिव की भक्त बनी रही, वे बिना पूजन किये जल भी ग्रहण नहीं करती थीं। आत्मरक्षा के साथ उन्हें अच्छी शिक्षा भी दी गई थी।कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए नपा अध्यक्ष ने कहा कि अहिल्याबाई होलकर के आदर्शों को आत्मसात करके ही हम सभी लोग महिला सशक्तिकरण को चरितार्थ कर सकते हैं। इस अवसर पर
श्याम सुंदर जायसवाल,आदित्य नारायण गुप्ता,किरण पाठक, सावित्री राय, रामधनी गोंड, सुषमा दुबे ने भी संबोधित किया
इस दौरान विवेक गुप्त नगर मंडलअध्यक्ष, अंगद तिवारी, निखिल राजा, विजय विश्वकर्मा उर्फ सनी, निरुपमा प्रताप, रतन वर्मा, सरवन गुप्ता, मीना देवी, अयजा खातून, सविता वर्मा क्षेत्र की सैकड़ो महिलाएं मौजूद रही। कार्यक्रम का संचालन शम्भू दयाल भारती ने किया।

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