विचारों को पढ़ने मात्र से जीवन में,कोई परिवर्तन नहीं आ पाता है,विचारों को अमल में ले आने सेजीवन परिवर्तित हो सुधर जाता है।
गुरु शिक्षा ग्रहण किया जिसने,
निज जीवन सुधार लिया उसने,
प्रथम गुरू माता पिता होते हैं,
दूसरे गुरु शिक्षक ज्ञान देते हैं।
भवसागर से पार उतारे ईश्वर
सबके गुरूदेव भगवान् होते हैं,
एक गुरू धरती माता होती हैं,
जहाँ पलकर सभी बड़े होते हैं।
ढाई अक्षर प्रेम के हर प्राणी में
वास करने वाले भी गुरु होते हैं,
सत्य, धर्म, ईमान और परसेवा
सबके जीवन में सदा गुरु होते हैं।
आदित्य कवि विनय गुरु से है,
कि दीजिये ज्ञान सभी को ऐसा,
सबका जीवन महान बन जाये,
इहलोक व परलोक सुधर जाये।
सृष्टि के सभी गूरूओं को हाथ
जोड़ करता हूँ प्रणाम और नमन,
गुरू पूर्णिमा के पावन पर्व पर सब
मित्रों को हार्दिक बधाई व नमन।
कर्नल आदि शंकर मिश्र,आदित्य
लखनऊ
मऊ (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद के डीएवी इंटर कॉलेज में आयोजित टीईटी परीक्षा के दौरान…
मऊ (राष्ट्र की परंपरा)।भीषण गर्मी के बीच नगर पालिका परिषद मऊ की लापरवाही लोगों के…
दौसा (राष्ट्र की परम्परा)। राजस्थान के दौसा जिले में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर बुधवार तड़के एक…
महंगाई के बीच LPG उपभोक्ताओं के लिए राहत की खबर है। तेल विपणन कंपनियों ने…
काबुल/इस्लामाबाद (राष्ट्र की परम्परा)। पाकिस्तान द्वारा अफगानिस्तान में कथित एयरस्ट्राइक किए जाने के बाद दोनों…
दिलीप कुमार अग्रवाल विवेक को बुद्धि, ज्ञान, प्रज्ञा, सूझबूझ अथवा समझदारी भी कहा जाता है।…