यूपी-बिहार में MLC चुनाव: कहीं बंपर वोटिंग तो कहीं बवाल! 4 बजे तक यूपी में 55.24%, बिहार में शिक्षक मतदाताओं ने दिखाया दम
लखनऊ/पटना (✍️ राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। उत्तर प्रदेश और बिहार में विधान परिषद की सीटों के लिए शुक्रवार को हुए मतदान में मतदाताओं का उत्साह देखने को मिला। कहीं शिक्षक मतदाताओं ने जमकर वोट बरसाए तो कहीं स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान की रफ्तार अपेक्षाकृत धीमी रही। वहीं, उत्तर प्रदेश के कई जिलों से भाजपा और समाजवादी पार्टी के समर्थकों के बीच नोकझोंक, हंगामे और मतदान प्रक्रिया में बाधा डालने के आरोपों ने चुनावी माहौल को गरमा दिया। अब सभी की निगाहें मतगणना और चुनाव परिणामों पर टिकी हैं।
उत्तर प्रदेश में विधान परिषद की 11 सीटों के लिए शाम चार बजे तक 55.24 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। इनमें पांच स्नातक और छह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं। दूसरी ओर, बिहार की आठ सीटों के लिए शाम चार बजे तक शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में 74.55 प्रतिशत और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में 43.87 प्रतिशत मतदान हुआ। बिहार में शिक्षक मतदाताओं की भागीदारी स्नातक मतदाताओं की तुलना में काफी अधिक रही।
यूपी में गोरखपुर-फैजाबाद के शिक्षक मतदाताओं ने दिखाई ताकत उत्तर प्रदेश में गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में सर्वाधिक मतदान दर्ज किया गया। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, यहां 79.09 प्रतिशत शिक्षक मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। इस निर्वाचन क्षेत्र के 17 जिलों में 200 मतदान केंद्र बनाए गए थे। मतदान के दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए, हालांकि कुछ स्थानों पर राजनीतिक समर्थकों के बीच कहासुनी की खबरें भी सामने आईं।
स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में लखनऊ खंड सबसे पीछे रहा, जहां शाम चार बजे तक 38.02 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। मेरठ खंड स्नातक सीट पर 39.81 प्रतिशत और शिक्षक सीट पर 60.80 प्रतिशत मतदान हुआ। गाजियाबाद में स्नातक सीट पर 26.76 प्रतिशत तथा शिक्षक सीट पर 56.03 प्रतिशत वोट पड़े। गौतमबुद्धनगर में स्नातक मतदाताओं का मतदान प्रतिशत 35.31 और शिक्षक मतदाताओं का 52.71 प्रतिशत रहा।
शामली जिले में दोनों श्रेणियों में अपेक्षाकृत बेहतर मतदान देखने को मिला। यहां स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में 61.95 प्रतिशत और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में 78.26 प्रतिशत मतदान हुआ। बागपत में स्नातक सीट पर 57.83 प्रतिशत तथा शिक्षक सीट पर 45.68 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। हापुड़ में स्नातक सीट पर 32.68 प्रतिशत और शिक्षक सीट पर 61.78 प्रतिशत वोट पड़े। सहारनपुर में दोनों सीटों पर क्रमशः 36.14 और 53.43 प्रतिशत मतदान हुआ, जबकि बुलंदशहर में स्नातक सीट पर 39 प्रतिशत और शिक्षक सीट पर 61.22 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया।
फर्जी मतदान के आरोपों से गरमाया सियासी माहौल मतदान के दौरान उत्तर प्रदेश के कई जिलों में भाजपा और सपा समर्थकों के बीच विवाद की खबरें सामने आईं। समाजवादी पार्टी ने कुछ स्थानों पर फर्जी मतदान और अपने समर्थकों को वोट डालने से रोकने के आरोप लगाए। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
आगरा के फतेहाबाद स्थित मतदान केंद्र पर सपा कार्यकर्ताओं ने बूथ संख्या 45 और 26 से भाजपा कार्यकर्ताओं पर मतपत्र छीनने का आरोप लगाया। शिकायत के अनुसार, इस घटना के चलते करीब 15 मिनट तक मतदान प्रभावित रहा। सूचना मिलने पर पुलिस आयुक्त दीपक कुमार, डीसीपी अभिषेक अग्रवाल और एडीएम वित्त एवं राजस्व संदीप वर्मा पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे।
बागपत के खेकड़ा में भी मतदान केंद्र पर राजनीतिक तनाव देखने को मिला। भाजपा जिलाध्यक्ष और क्षेत्राधिकारी के बीच तीखी बहस के बाद भाजपा कार्यकर्ता धरने पर बैठ गए। बाद में एएसपी ने मौके पर पहुंचकर दोनों पक्षों के बीच मामला शांत कराया। सीओ के खेद जताने के बाद धरना समाप्त हो गया।
गोरखपुर में सपा प्रत्याशी डॉ. संजयन त्रिपाठी के बयान देने को लेकर भाजपा समर्थकों ने विरोध जताया। भाजपा मंडल प्रभारी आशीष गुप्ता ने मतदान केंद्र परिसर में बयान देने पर आपत्ति की, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच कहासुनी हुई। अन्य जिलों में भी छिटपुट विवादों की सूचनाएं मिलीं।
अखिलेश यादव और स्वतंत्र देव सिंह ने भी डाला वोट समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इटावा के सैफई में मतदान किया। वोट डालने के बाद उन्होंने मतदाताओं से लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए मतदान करने की अपील की। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ स्थानों पर सपा समर्थकों को मतदान करने से रोकने की कोशिश की गई। अखिलेश ने दावा किया कि आम जनता सरकार के खिलाफ मतदान कर रही है।
वहीं, उत्तर प्रदेश सरकार के जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने इलाहाबाद-झांसी खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में उरई स्थित मतदान केंद्र पर वोट डाला। उन्होंने भाजपा की जीत का भरोसा जताते हुए सपा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के प्रतिनिधि विधान परिषद में संबंधित वर्गों की समस्याओं को उठाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
बिहार में सारण शिक्षक सीट पर सबसे ज्यादा मतदान बिहार विधान परिषद की चार स्नातक और चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की आठ सीटों पर शाम चार बजे तक के आंकड़ों में शिक्षक मतदाता आगे रहे। शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में कुल 74.55 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जबकि स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में यह आंकड़ा 43.87 प्रतिशत रहा।
बिहार की स्नातक सीटों में कोसी निर्वाचन क्षेत्र 52.51 प्रतिशत मतदान के साथ सबसे आगे रहा। तिरहुत में 42.15 प्रतिशत, दरभंगा में 42 प्रतिशत और पटना में 36.19 प्रतिशत मतदान हुआ।
शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में सारण ने 87.16 प्रतिशत मतदान के साथ शीर्ष स्थान हासिल किया। दरभंगा में 79 प्रतिशत और तिरहुत में 78.10 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में सबसे कम 56.89 प्रतिशत मतदाताओं ने वोट डाला।
150 उम्मीदवारों की किस्मत दांव पर बिहार की आठ सीटों पर कुल 150 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। इनमें स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों से 90 और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों से 60 प्रत्याशी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। स्नातक सीटों में दरभंगा से सर्वाधिक 40 उम्मीदवार मैदान में हैं। पटना से 18, तिरहुत से 17 और कोसी से 15 प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं।
शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में पटना और सारण से 18-18, दरभंगा से 13 तथा तिरहुत से 11 प्रत्याशी मैदान में हैं। मौजूदा विधान पार्षदों के सामने भी अपनी सीट बचाने की चुनौती है। इन चुनावों के नतीजे तय करेंगे कि संबंधित क्षेत्रों के मतदाता किसे अपना प्रतिनिधि चुनते हैं।
वरीयता के आधार पर होगी मतगणना स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान की प्रक्रिया सामान्य चुनावों से अलग होती है। मतदाता उम्मीदवारों को अपनी पसंद के अनुसार पहली, दूसरी और आगे की वरीयता देते हैं। मतगणना में पहले पहली वरीयता के मत गिने जाते हैं। निर्धारित कोटा हासिल करने वाला प्रत्याशी विजेता घोषित किया जा सकता है। यदि कोई उम्मीदवार आवश्यक कोटा हासिल नहीं करता, तो नियमानुसार सबसे कम मत पाने वाले प्रत्याशी को बाहर कर उसके मतपत्रों पर दर्ज अगली वरीयताओं के आधार पर मतों का हस्तांतरण किया जाता है। यह प्रक्रिया चुनाव नियमों के अनुसार विजेता तय होने तक चलती है।
बिहार में आठों सीटों के लिए 27 अक्टूबर को मतगणना निर्धारित है। उत्तर प्रदेश की 11 सीटों के चुनाव परिणाम भी मतगणना के बाद स्पष्ट होंगे। फिलहाल दोनों राज्यों में मतदान के आंकड़ों, राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और उम्मीदवारों की जीत-हार को लेकर चर्चाएं तेज हैं। अब देखना होगा कि मतदाताओं का फैसला किस दल और किस उम्मीदवार के पक्ष में जाता है।
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