जब करे ओडिसा की यात्रा एक बार जरूर जाए उदयगिरि–खंडगिरि की गुफाएं: ओडिशा की धरती पर जीवंत इतिहास, साधना और शिल्पकला की अनमोल विरासत
ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर के समीप स्थित उदयगिरि और खंडगिरि की गुफाएं केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि प्राचीन भारत की आध्यात्मिक चेतना, तपस्या और उत्कृष्ट शिल्पकला का जीवंत दस्तावेज हैं। इन पहाड़ियों पर कदम रखते ही ऐसा प्रतीत होता है मानो इतिहास स्वयं बोल उठता हो। चट्टानों को काटकर बनाई गई गुफाएं, शिलालेख, नक्काशियां और प्राकृतिक एकांत — सब मिलकर इस स्थान को अद्वितीय बनाते हैं।
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इतिहास के गर्भ से निकली जैन परंपरा की धरोहर
इतिहासकारों के अनुसार, उदयगिरि और खंडगिरि की गुफाओं का निर्माण दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व में हुआ था। इनका सीधा संबंध जैन धर्म से है। यह स्थल प्राचीन कलिंग साम्राज्य के उस दौर की याद दिलाता है जब जैन मुनि कठोर तपस्या, ध्यान और आत्मचिंतन के लिए निर्जन पहाड़ियों को चुनते थे।
उदयगिरि पहाड़ी पर स्थित हाथीगुफा शिलालेख इस स्थल का सबसे महत्वपूर्ण ऐतिहासिक प्रमाण है। इस शिलालेख में महान कलिंग नरेश राजा खारवेल के शासन, उनकी उपलब्धियों और धार्मिक उदारता का विस्तृत वर्णन मिलता है। यह शिलालेख न केवल ओडिशा, बल्कि पूरे भारत के प्राचीन इतिहास को समझने की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
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उदयगिरि: शिल्प, इतिहास और साधना का संगम
उदयगिरि पहाड़ी पर कुल 18 गुफाएं हैं, जिनमें रानीगुफा, गणेशगुफा, व्याघ्रगुफा और हाथीगुफा प्रमुख हैं।
रानीगुफा दो मंजिला है और इसकी दीवारों पर बनी नक्काशियां तत्कालीन समाज, राजसी जीवन और धार्मिक आस्थाओं को दर्शाती हैं।
व्याघ्रगुफा का प्रवेश द्वार बाघ के मुख के आकार में बनाया गया है, जो प्राचीन कलाकारों की कल्पनाशीलता और तकनीकी दक्षता को दर्शाता है।
गणेशगुफा में बनी मूर्तियां और उत्कीर्ण आकृतियां धार्मिक सहिष्णुता और कलात्मक समृद्धि का प्रतीक हैं।
इन गुफाओं में उकेरी गई हाथी, सिंह, नृत्य करते मानव और पौराणिक दृश्य उस कालखंड की सामाजिक और सांस्कृतिक झलक प्रस्तुत करते हैं।
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खंडगिरि: एकांत, शांति और आत्मिक अनुभूति
उदयगिरि के ठीक सामने स्थित खंडगिरि पहाड़ी अपेक्षाकृत शांत और कम भीड़भाड़ वाली है। यहां कुल 15 गुफाएं हैं, जो साधना और निवास के लिए उपयोग में लाई जाती थीं। खंडगिरि की चढ़ाई थोड़ी कठिन है, लेकिन ऊपर पहुंचने पर दिखाई देने वाला भुवनेश्वर शहर का विहंगम दृश्य मन को गहरे तक सुकून देता है।
सूर्यास्त के समय पहाड़ी से दिखता आकाश और शहर की रोशनी इस स्थान को फोटोग्राफी प्रेमियों के लिए स्वर्ग बना देती है। यही कारण है कि उदयगिरि खंडगिरि गुफाएं आज भी ध्यान, शांति और आत्मिक ऊर्जा की तलाश में निकले यात्रियों को आकर्षित करती हैं।
पहुंचना है बेहद आसान
उदयगिरि और खंडगिरि गुफाएं भुवनेश्वर रेलवे स्टेशन और बीजू पटनायक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से मात्र 6–7 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं।
ऑटो रिक्शा,टैक्सी,स्थानीय बस के जरिए पर्यटक कुछ ही मिनटों में यहां पहुंच सकते हैं। शहर की चहल-पहल से निकलते ही पहाड़ियों की शांति मन को स्वतः अपनी ओर खींच लेती है।
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पर्यटन के साथ स्थानीय स्वाद का आनंद
गुफाओं के आसपास छोटे-छोटे स्टॉल और स्थानीय भोजनालय मौजूद हैं, जहां पर्यटक ओडिशा के पारंपरिक स्नैक्स, चाय और हल्के नाश्ते का आनंद ले सकते हैं। घूमते-घूमते यहां बैठकर सुस्ताना यात्रा को और भी सुखद बना देता है।
क्यों खास हैं उदयगिरि–खंडगिरि गुफाएं?
जैन धर्म से जुड़ा प्राचीन साधना केंद्र
दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व का ऐतिहासिक महत्व
राजा खारवेल से संबंधित दुर्लभ शिलालेख
अद्वितीय शिल्पकला और नक्काशी
फोटोग्राफी और इतिहास प्रेमियों के लिए आदर्श स्थल
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इतिहास से जुड़ने का एक अनूठा अनुभव
उदयगिरि और खंडगिरि का भ्रमण केवल आंखों से देखने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मन और आत्मा से जुड़ने का अनुभव है। यहां खड़े होकर प्राचीन साधुओं की तपस्या, कलाकारों की मेहनत और इतिहास की गूंज को महसूस किया जा सकता है।
आज के दौर में जब तेज़ रफ्तार जीवन में शांति दुर्लभ होती जा रही है, तब उदयगिरि खंडगिरि गुफाएं ओडिशा हमें ठहरकर सोचने, समझने और महसूस करने का अवसर देती हैं। यह स्थल न केवल ओडिशा के गौरवशाली अतीत का प्रतीक है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी सांस्कृतिक धरोहर के रूप में संरक्षित रहने योग्य है।
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