यूपी बोर्ड परीक्षा में जूते–मोजे की छूट के बीच ‘केंद्र बम’ फूटा,

सिकंदरपुर के 15 केंद्रों पर ठूंसे गए 13,932 परीक्षार्थी

बलिया (राष्ट्र की परम्परा)। यूपी बोर्ड परीक्षा–2026 की उलटी गिनती शुरू होते ही सिकंदरपुर तहसील में केंद्र निर्धारण को लेकर बड़ा बवाल खड़ा हो गया है। 18 फरवरी से शुरू होने वाली परीक्षा से पहले जारी अंतिम केंद्र सूची ने शासन–प्रशासन की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यूपी बोर्ड की वेबसाइट के मुताबिक सिकंदरपुर क्षेत्र में महज 15 परीक्षा केंद्रों पर 13,932 परीक्षार्थियों को बैठाने की व्यवस्था की गई है। इनमें हाईस्कूल के 6,442 और इंटरमीडिएट के 7,490 छात्र–छात्राएं शामिल हैं।

सीमित केंद्रों में इतनी बड़ी संख्या में परीक्षार्थियों का आवंटन शिक्षा जगत और अभिभावकों के लिए चिंता का विषय बन गया है। जानकारों का कहना है कि कई केंद्रों की धारण क्षमता पहले से तय है, इसके बावजूद इस बार अधिकांश केंद्रों पर क्षमता से कहीं अधिक छात्रों को ठूंस दिया गया है। इससे बैठने की व्यवस्था, कक्ष नियंत्रण, निगरानी और अनुशासन बनाए रखना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकता है। भीड़ बढ़ने की स्थिति में नकल रोकने की बोर्ड की मंशा पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

जूते–मोजे की छूट, लेकिन जांच सख्त

इसी बीच यूपी बोर्ड ने परीक्षार्थियों को बड़ी राहत देते हुए जूते–मोजे पहनकर परीक्षा देने की अनुमति दे दी है। अब परीक्षा कक्ष के बाहर जूते–मोजे उतरवाने की बाध्यता नहीं होगी, जिससे ठंड के मौसम में छात्रों को सुविधा मिलेगी और केंद्रों पर अव्यवस्था भी कम होगी। हालांकि बोर्ड ने साफ कर दिया है कि नकल पर किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी।

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निर्देशों के अनुसार:

• प्रवेश द्वार पर सघन तलाशी अनिवार्य होगी

• केंद्र व्यवस्थापक और स्टेटिक मजिस्ट्रेट को छोड़कर किसी को मोबाइल/इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस ले जाने की अनुमति नहीं

• शौचालयों की सफाई, प्रकाश, पेयजल और स्वच्छ वातावरण सुनिश्चित करना केंद्र व्यवस्थापकों की जिम्मेदारी

• लापरवाही पर सख्त कार्रवाई होगी

प्रशासन का दावा—तैयारियां पूरी

जिला विद्यालय निरीक्षक बलिया देवेंद्र कुमार गुप्ता ने बताया कि सभी प्रधानाचार्यों को केंद्र तैयारियों के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि परीक्षा की पारदर्शिता और अनुशासन से कोई समझौता नहीं होगा, साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि किसी परीक्षार्थी को अनावश्यक परेशानी न हो।
अब बड़ा सवाल यह है कि सीमित केंद्रों में भारी भीड़ के बीच 18 फरवरी से शुरू होने वाली यूपी बोर्ड परीक्षा कितनी सुचारु रूप से संचालित हो पाएगी। प्रशासन की तैयारियों की असली परीक्षा परीक्षा शुरू होने के साथ ही होगी।

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Karan Pandey

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