Tuesday, February 17, 2026
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पहली किस्त जारी दूसरी में नही दिया कमीशन तो हो गयी रीता अपात्र

अधिकारियों कर्मचारियों के मनमानी से रीता के चार बच्चे खुली आसमान के नीचे रहने पर विवश पारदर्शिता का उड़ रहा मख़ौल

बलरामपुर(राष्ट्र की परम्परा)। भगवतीगंज विशुनीपुर में बैठक लेने गये जिला मीडिया प्रभारी डीपी सिंह बैस ने रीता के आवास को देखा तो उन्होंने काम बन्द था कारण पूछा तो भाजपा बूथ अध्यक्ष छिटाईलाल ने बताया कि दूसरी किस्त के लिए दस प्रतिशत रिश्वत मांगी जा रही है।जब मामला सज्ञान में आया तो इसकीकी शिकायत जिला मीडिया प्रभारी डीपी सिंह बैस द्वारा सम्बन्धित अधिकारियों से किया गया।इसी दौरान जानकारी में मिली कि तत्कालीन पीओ डूडा विजया तिवारी सरर्वेयर के माध्यम से खुले रूप से दस प्रतिशत की वसूली कराती है माध्यम उन्होंने अपने साथ रह रही महिला के खाते को बनाती है,तरीका यह अपनाती है की पारदर्शिता बनी रहे पर उस समय पारदर्शिता धरि रह गई जब इनके द्वारा लाभर्थियों को बताया गया कि जब पैसा भेज दे तो उसकी स्क्रीन शॉट मेरे वाट्सएप पर भेजे। पीओ डूडा विजया तिवारी के मोबाइल पर मंगाई गई स्क्रीन शॉट वायरल हो गया। यही नही अपनी हस्ताक्षर को बनाने की शिक्षा देते व प्रेक्टिकल कराते अपना हस्ताक्षर सिखाने का वीडियो भी वायरल हुआ।अपना हस्ताक्षर सिखाने की जरूरत इस लिए जरूरी हो गया कि मैडम के लखनऊ प्रवास में खलल न पड़े। जरूरत हो तो पत्रावली के ऊपर कर्मचारी द्वारा हस्ताक्षर बनवाकर प्रस्तुत किया जा सके। वायरल पर शिकायत होने पर अधिकारियों ने खामियां जाना यह सारी शिकायतें रीता के आवास में कमीशन के माँग के बाद आरंभ हुआ था इसलिए पीओ डूडा विजया तिवारी ने अपने को फंसते हुए देखकर अपने बचाव में 10 सर्वेयर पर मुकदमा दर्ज करा दिया और अधिकारियों कर्मचारियों से मिलकर रीता तथा लोगों का जिनको प्रथम किस्त मिल चुकी थी को भी अपात्र घोषित करा दिया।
सवाल उठता है कि जिन जिन लोगों को प्रथम किस्त मिली कई प्रकार के जांच के बाद पात्र पाया गया और प्रथम किस्स दिया गया अचानक लोगों को अपात्र घोषित कर दिया गया‌। भाजपा जिला मीडिया प्रभारी डीपी सिंह बैस ने वर्तमान पीओ डूडा से जानकारी मांगी है जिन लोगों को एक किस्त मिलने के बाद दूसरी किस्त निर्गत करते समय अपात्र घोषित किया गया तो जिन कर्मचारी,अधिकारी द्वारा पात्र घोषित किया गया था उनके विरुद्ध क्या कार्रवाई की गई। इसे उजागर किया जाए नही तो हमारी सरकार के पारदर्शी नीतियाँ सवाल के घेरे में खड़ी हो जाएगी।

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