Wednesday, February 18, 2026
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केन्द्र के परिक्षेत्र पर सीडर मशीन से धान की सीधी बुवाई कर प्रभारी ने कृषकों को दी जानकारी

बहराइच ( राष्ट्र की परम्परा) । नानपारा कृषि विज्ञान केन्द्र के परिक्षेत्र पर सीधी बुआई मशीन (सीडर) से प्रजाति क्यूयों की बुआई की गई। धान की सीधी विधि से जिले में लगभग 2000 हेक्टर बुआई हो चुकी है।
केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ के एम सिंह ने बताया कि धान की सीधी बुवाई करने से किसानों के लागत मूल्य का समय एवं मानव श्रम की काफी बचत होती है। डॉ के एम सिंह ने बताया कि धान की मशीन से पलेवा करके अथवा सूखा खेत तैयार करके बुआई करें। इस विधि में खरपतवार अधिक आने की संभावना रहती है, इनके प्रबंधन हेतु बुवाई के 24 घंटे के अंदर खेत में नमी की स्थिति में पेंडामेथिलीन 30% ई सी – 1.33 लीटर अथवा पाइरेजोसल्फ्यूरान इथायल 10% डब्लू पी – 80 ग्राम प्रीइमर्जेंस (खरपतवार के जमाव से पूर्व) का 200 लीटर पानी में घोल कर स्प्रे करें। बुआई से 12 से 14 दिन पर पहली सिंचाई करें। इसके बाद पेनाक्सुलम 1.02% + सायहेलोफोप 5.1% (विवाया) – 800 मिली अथवा बिसपायरीबेक सोडियम 10% एस सी – 100 मिली प्रति एकड़ खरपतवारनाशी का 15 से 18 दिन पर 200 पानी में घोल बना कर स्प्रे करें।
केंद्र के पादप प्रजन वैज्ञानिक डॉ अरुण कुमार ने बताया कि इस वर्ष धान की सुगंधित प्रजाति पूसा बासमती- 1885, पूसा बासमती- 1886, पूसा बासमती- 1692, काला नमक सिद्धार्थनगर की लोकल प्रजाति एवं पूसा नरेंद्र काला नमक -1 तथा जलभराव प्रतिरोधी प्रजातियाँ – आई आर -64 सब -1, एन डी जी आर-702 का बीज उत्पादन किया जा रहा है, जिसे आगामी वर्ष में जिले के किसानों उपलब्ध कराया जायेगा। डॉ एस बी सिंह ने बताया कि खेत की सामान्य उर्वरता पर बुआई के समय 50 किलो डी ए पी, 25 किलो एम ओ पी एवं 25 किलो यूरिया का प्रयोग करें।
पौध संरक्षण वैज्ञानिक डॉ हर्षिता ने बताया कि कार्बेंडाजिम अथवा थीरम 50 ग्राम तथा स्ट्रेप्टोमाइसिन 4 ग्राम प्रति 25 किलो बीज को उपचार करके बुवाई करें। जिससे बीज जनित बीमारियों से बचाया जा सके।

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