देवरिया में मिठाई की दुकानों पर ‘टुडे’ का खेल! पुरानी मिठाई को ताजा बताकर बेचने का आरोप, खाद्य विभाग की निगरानी पर उठे सवाल

काउंटर पर ‘टुडे’ और एक्सपायरी में 4 या 7 दिन का जिक्र, आखिर मिठाई कब बनी? त्योहारों में ग्राहकों की सेहत से खिलवाड़ की आशंका

गौरव कुशवाहा की रिपोर्ट

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। त्योहारों का मौसम आते ही मिठाई की दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ बढ़ जाती है। लोग अपनों का मुंह मीठा कराने के लिए मिठाइयां खरीदते हैं, लेकिन अगर मिठाई के ताजा होने की तारीख ही स्पष्ट न हो तो भरोसा कैसे किया जाए? देवरिया में मिठाई दुकानों पर निर्माण तिथि और उपभोग की समय-सीमा लिखने के तरीके को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि कुछ दुकानों के काउंटर पर मिठाइयों के सामने वास्तविक तारीख की जगह केवल ‘टुडे’ लिखा जा रहा है, जबकि एक्सपायरी के कॉलम में 4 दिन या 7 दिन जैसी अवधि दर्ज है। इस मामले ने खाद्य सुरक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित दुकानों के खिलाफ विभागीय जांच की स्थिति स्पष्ट होना अभी बाकी है। ‘टुडे’ लिख देने से कैसे पता चलेगी मिठाई की असली उम्र? मिठाई के काउंटर पर रखी ट्रे के सामने अगर निर्माण की वास्तविक तारीख के बजाय केवल ‘टुडे’ लिखा हो, तो ग्राहक के लिए यह जानना मुश्किल हो सकता है कि मिठाई वास्तव में कब तैयार की गई थी। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ऐसी व्यवस्था में पुरानी मिठाई को नई बताकर बेचने की आशंका से इनकार किया जा सकता है? यदि किसी दुकान पर तारीख संबंधी जानकारी केवल एक सामान्य पर्ची के आधार पर प्रदर्शित की जा रही है और उसे प्रतिदिन वास्तविक जानकारी के अनुसार अपडेट नहीं किया जाता, तो उपभोक्ता के लिए मिठाई की ताजगी का आकलन करना कठिन हो सकता है। ऐसे मामलों में संबंधित दुकानों के रिकॉर्ड, मिठाई तैयार करने की तारीख और भंडारण की स्थिति की जांच जरूरी है। 4 दिन या 7 दिन की अवधि, लेकिन तारीख कहां है? मिठाई की ट्रे पर ‘4 डे’ या ‘7 डे’ जैसी अवधि लिखे होने से उपभोक्ता के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि यह समय-सीमा किस तारीख से लागू होती है। अगर निर्माण की तारीख स्पष्ट नहीं है, तो ग्राहक के लिए अंतिम उपभोग की अवधि का सही हिसाब लगाना मुश्किल हो सकता है। हालांकि, अलग-अलग मिठाइयों की सुरक्षित उपभोग अवधि उनकी सामग्री, निर्माण प्रक्रिया, पैकेजिंग और भंडारण की परिस्थितियों पर निर्भर करती है। इसलिए केवल 4 या 7 दिन लिखे होने से किसी मिठाई को स्वतः बासी या असुरक्षित नहीं कहा जा सकता। वास्तविक स्थिति का पता निरीक्षण और संबंधित रिकॉर्ड की जांच से ही चलेगा। खाद्य सुरक्षा विभाग की निगरानी पर उठे सवाल त्योहारी सीजन में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करना खाद्य सुरक्षा विभाग की अहम जिम्मेदारी है। ऐसे में मिठाई की दुकानों पर तारीखों के प्रदर्शन को लेकर शिकायतें सामने आती हैं, तो विभाग को जांच कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। सवाल यह भी है कि दुकानों पर नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए निरीक्षण किस स्तर पर हो रहे हैं और कमियां मिलने पर क्या कार्रवाई की जा रही है। यदि जांच में किसी दुकान पर खाद्य सुरक्षा मानकों का उल्लंघन पाया जाता है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही, जिन दुकानों पर सब कुछ नियमों के अनुसार है, उनकी स्थिति भी स्पष्ट होनी चाहिए, ताकि बिना प्रमाण किसी प्रतिष्ठान की छवि प्रभावित न हो। त्योहारों में मिठाई खरीदते समय ग्राहक भी रहें सतर्क मिठाई खरीदते समय ग्राहक निर्माण तिथि, अंतिम उपभोग की जानकारी, पैकेजिंग और भंडारण की स्थिति पर ध्यान दें। खुली मिठाई के मामले में दुकानदार से उसकी तैयारी और सुरक्षित उपभोग अवधि की जानकारी मांगें। गंध, रंग या बनावट असामान्य लगे तो मिठाई खरीदने से बचें। देवरिया में उठे इन सवालों का स्पष्ट जवाब जांच के बाद ही सामने आएगा। अब निगाहें खाद्य सुरक्षा विभाग और जिला प्रशासन पर हैं कि वे मिठाई की दुकानों पर तारीखों के प्रदर्शन की व्यवस्था की जांच कर उपभोक्ताओं की शंकाओं को दूर करते हैं या नहीं। त्योहारों की मिठास बरकरार रखने के लिए जरूरी है कि मिठाई की गुणवत्ता के साथ उसकी सही जानकारी भी ग्राहकों तक पहुंचे।