
रांची (राष्ट्र की परम्परा)। झारखंड सरकार के मंत्री और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के वरिष्ठ नेता सुदिव्य कुमार के निधन से प्रदेश की राजनीति में शोक की लहर है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, विधानसभा अध्यक्ष रवींद्र नाथ महतो समेत कई नेताओं ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सुदिव्य कुमार के निधन को अपने लिए व्यक्तिगत क्षति बताया। उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर भावुक संदेश में कहा कि कुमार उनके लिए केवल वरिष्ठ सहयोगी या राजनीतिक साथी नहीं, बल्कि बड़े भाई की तरह थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके निधन से जीवन में ऐसी कमी पैदा हुई है, जिसे शब्दों में व्यक्त करना कठिन है।
सोरेन ने कहा कि झारखंड आंदोलन के दौर से ही सुदिव्य कुमार ने झामुमो के संस्थापक शिबू सोरेन के साथ पूरी निष्ठा के साथ काम किया। पार्टी के समर्पित कार्यकर्ता के रूप में उन्होंने अपना जीवन झारखंड की पहचान, अधिकार और गौरव की लड़ाई को समर्पित कर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘झारखंडियत’ के प्रति कुमार की प्रतिबद्धता और उनका जुझारूपन हमेशा याद किया जाएगा।
झामुमो ने भी सुदिव्य कुमार के निधन को पार्टी, सरकार और पूरे झारखंड के लिए अपूरणीय क्षति बताया। पार्टी की ओर से जारी शोक संदेश में उनके परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई।
सुदिव्य कुमार पहली बार वर्ष 2019 में गिरिडीह विधानसभा सीट से झारखंड विधानसभा के लिए निर्वाचित हुए थे। उन्हें मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का करीबी सहयोगी माना जाता था। पार्टी के भीतर कई महत्वपूर्ण राजनीतिक परिस्थितियों में उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई थी।
वर्ष 2024 में भूमि धोखाधड़ी और धनशोधन मामले में हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी के बाद झामुमो के सामने आए राजनीतिक संकट के दौरान भी सुदिव्य कुमार की भूमिका महत्वपूर्ण रही थी।
कुमार हाल ही में कर्नाटक से लौटे थे। वह झारखंड सरकार के एक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करते हुए वहां पर्यटन बुनियादी ढांचे के प्रबंधन और विकास के तौर-तरीकों का अध्ययन करने गए थे। इस दौरान उन्होंने कर्नाटक के पर्यटन मंत्री के. जे. जॉर्ज से मुलाकात कर दोनों राज्यों के बीच पर्यटन और वन प्रबंधन के क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा की थी।
मुख्यमंत्री सोरेन ने अपने शोक संदेश में कहा कि सुदिव्य कुमार का स्नेह, संघर्ष और झारखंड के प्रति समर्पण हमेशा उनकी स्मृतियों में जीवित रहेगा। उनके निधन से झामुमो के साथ-साथ प्रदेश की राजनीति में भी एक महत्वपूर्ण स्थान रिक्त हो गया है।