Thursday, February 12, 2026
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मौनानुभूति चिकित्सा शिविर: जीवन रूपांतरण की आध्यात्मिक औषधि का अनुभव

धरा धाम इंटरनेशनल के सौजन्य से धर्म-विज्ञान के समन्वय की अनूठी पहल

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। जिले के ग्राम भस्मा स्थित धरा धाम इंटरनेशनल के परिसर में एक ऐतिहासिक एवं अद्वितीय “मौनानुभूति चिकित्सा शिविर” का सफल आयोजन किया गया। यह शिविर न केवल साधना का केंद्र बना, बल्कि मानव चेतना के जागरण का एक जीवंत उदाहरण भी सिद्ध हुआ।
धरा धाम इंटरनेशनल के मार्गदर्शन में आयोजित इस शिविर का उद्देश्य धर्म और विज्ञान के समन्वय द्वारा शरीर, मन और आत्मा की समग्र चिकित्सा करना रहा। शिविर में मौन साधना, ऊर्जा चिकित्सा, मंत्र चिकित्सा, आत्मिक चिंतन और आधुनिक वैज्ञानिक चिकित्सा पद्धतियों का समावेश करते हुए एक अभिनव उपचार पद्धति प्रस्तुत की गई।
शिविर का शुभारंभ अंतरराष्ट्रीय बाल व्यास श्वेतिमा माधव प्रिया द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार और दीप प्रज्वलन से हुआ। उनके मंत्रों की दिव्यता से संपूर्ण वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हो उठा।
मुख्य वक्ता के रूप में मौनानुभूति चिकित्सा पद्धति के प्रणेता, धरा धाम इंटरनेशनल के संस्थापक संत डॉ. सौरभ पाण्डेय ने कहा कि “मौन कोई साधारण चुप्पी नहीं, यह चेतना के द्वार खोलने वाली साधना है। जब वाणी शांत होती है, तब आत्मा की आवाज सुनाई देती है। धर्मों ने सदियों से मौन को साधना बताया है, और आज का विज्ञान इसे मानसिक चिकित्सा का प्रभावी माध्यम मान रहा है।”
उन्होंने बताया कि मौनानुभूति चिकित्सा अवसाद, तनाव, उच्च रक्तचाप, अनिद्रा और भावनात्मक असंतुलन जैसी समस्याओं में अत्यंत प्रभावशाली साबित हो रही है। यह चिकित्सा आत्मचिंतन, ऊर्जा संतुलन और मंत्रशक्ति को वैज्ञानिक पद्धति से जोड़ती है।
शिविर में बड़ी संख्या में साधक एवं नागरिक शामिल हुए। प्रतिभागियों ने मौन ध्यान के दौरान आत्मिक ऊर्जा, शांति और संतुलन का गहन अनुभव प्राप्त किया। यह शिविर आध्यात्मिक चिकित्सा के क्षेत्र में एक नई दिशा देने वाला सिद्ध हुआ।
कार्यक्रम के दौरान धार्मिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक सेवा के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान देने वाले गणमान्य लोगों को सम्मानित भी किया गया।
सम्मानित व्यक्तियों में प्रमुख रूप से राजन सिंह सूर्यवंशी, डॉ. विनय श्रीवास्तव, रामप्रसाद यादव, गौतम पाण्डेय, राम दरस चौरसिया, संदीप त्रिपाठी, ई. मिन्नत गोरखपुरी, बिपिन पाण्डेय, हाजी जलालउद्दीन कादरी, लक्ष्मी चंद शुक्ला, आकिब अंसारी, अमित पाण्डेय, कृष्ण चंद पाण्डेय, अविनाश शुक्ला, दरोगा सिंह, राम अशीष निषाद, कृपा शंकर राय, धर्मेंद्र त्रिपाठी, सोमनाथ पाण्डेय, गुरु पाण्डेय एवं राम धारी सिंह शामिल रहे।
इस अभिनव पहल के माध्यम से धरा धाम इंटरनेशनल ने आध्यात्मिक चिकित्सा को जनमानस से जोड़ने का सफल प्रयास किया है, जो आने वाले समय में मानवता के लिए एक वैश्विक चिकित्सा मॉडल बन सकता है।

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