6 साल में 489 करोड़ खर्च, फिर भी गंगा-सरयू का कटान नहीं थमा

78 परियोजनाओं के बाद भी गांव और खेत असुरक्षित, प्रशासन ने बनाई 12 बाढ़ चौकियां

(बलिया से घनश्याम तिवारी की रिपोर्ट)

बलिया (राष्ट्र की परम्परा) यूपी-बिहार की सीमा पर स्थित बलिया जिले में गंगा और सरयू नदियों का कटान अब भी गंभीर समस्या बना हुआ है। पिछले 6 वर्षों में इस संकट से निपटने के लिए 489 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं, लेकिन समस्या ज्यों की त्यों बनी हुई है। इस मानसून में भी दोनों नदियों की धार तेज होते ही कटान ने कई गांवों और खेतों को अपनी चपेट में लेना शुरू कर दिया है।

गांवों पर मंडरा रहा खतरा

गंगा नदी बलिया के दुबेछपरा, सुघरछपरा, रामगढ़ और नौरंगा इलाकों में तेजी से कटान कर रही है। वहीं सरयू नदी गोपालनगर और जेपी नगर में उपजाऊ जमीन और रिहायशी इलाकों को नुकसान पहुंचा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि करोड़ों खर्च होने के बावजूद कोई स्थायी समाधान नहीं हो सका है। “अगर इस पैसे से पक्का घाट या ठोस कटाव रोधी दीवारें बनाई जातीं, तो शायद अब तक यह समस्या खत्म हो चुकी होती,” एक ग्रामीण ने कहा।

78 परियोजनाएं, फिर भी असफलता

बाढ़ नियंत्रण विभाग के मुताबिक, 2019 से अब तक कुल 78 परियोजनाओं पर काम किया गया है। इसमें ठोकर निर्माण, डाउन स्ट्रीम कटर व अन्य उपाय शामिल हैं। विभाग के अधिशासी अभियंता संजय कुमार मिश्रा के अनुसार, “नदी की धारा हर साल बदलती है, जिससे एक जगह काम पूरा होते ही दूसरी जगह कटान शुरू हो जाता है। इसलिए निरंतर निगरानी और काम जरूरी है।”

प्रशासन की तैयारियां

पिछले वर्ष सरयू नदी के तांडव को देखते हुए इस बार प्रशासन सतर्क है। बांसडीह तहसील क्षेत्र में उपजिलाधिकारी अभिषेक प्रियदर्शी और तहसीलदार नितिन सिंह ने बाढ़ प्रभावित इलाकों का निरीक्षण किया। उपजिलाधिकारी ने बताया कि इस बार 12 बाढ़ चौकियां स्थापित की गई हैं, ताकि आपात स्थिति में त्वरित राहत और बचाव कार्य किए जा सकें।

निगरानी और जवाबदेही जरूरी

स्थानीय लोगों और विशेषज्ञों की मांग है कि परियोजनाओं की गुणवत्ता की जांच हो और ठेकेदारी प्रणाली में पारदर्शिता लाई जाए। जब तक कार्यों की जवाबदेही तय नहीं की जाएगी, तब तक करोड़ों रुपये खर्च कर देने के बावजूद गंगा और सरयू के कटान का स्थायी समाधान नहीं मिल पाएगा।

Editor CP pandey

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