दिल्ली में प्रदर्शन की तपिश तेज, सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टली; राहुल गांधी की हाई टी बैठक से विपक्ष ने बनाया आंदोलन का मेगा प्लान

Ai निर्मित

जंतर-मंतर पर CJP नेताओं की हिरासत से सियासी घमासान, वकील से मुलाकात नहीं कराने पर सवाल; चुनाव आयोग के खिलाफ INDIA गठबंधन का संघर्ष जारी रखने का ऐलान

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। राजधानी दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों को लेकर मंगलवार को सियासी सरगर्मी चरम पर रही। एक तरफ 10 अक्टूबर के प्रदर्शन से पहले मेट्रो स्टेशन बंद किए जाने और ट्रेन सेवाओं में व्यवधान के आरोपों से जुड़ी याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टल गई, तो दूसरी तरफ जंतर-मंतर पर प्रदर्शन, CJP नेताओं की हिरासत और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया। राहुल गांधी के आवास पर INDIA गठबंधन के नेताओं, विपक्षी सांसदों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों की हाई टी बैठक में आंदोलन को आगे बढ़ाने की रणनीति पर चर्चा हुई। विपक्ष ने साफ संकेत दिया कि चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और वोट चोरी के आरोपों को लेकर उसकी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है।
सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ को संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई करनी थी। हालांकि, न्यायमूर्ति वी. मोहना की तबीयत खराब होने के कारण सुनवाई स्थगित कर दी गई। अब इन मामलों पर 15 अक्टूबर, गुरुवार को सुनवाई प्रस्तावित है। याचिकाओं में 10 अक्टूबर के विरोध प्रदर्शन से पहले मेट्रो स्टेशन बंद करने और रेल सेवाओं में रुकावट से जुड़े मुद्दे उठाए गए हैं।
इधर, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति और हिरासत में लिए गए CJP नेताओं का मामला भी चर्चा के केंद्र में रहा। CJP नेताओं सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे सहित अन्य लोगों को हिरासत में रखे जाने को लेकर संगठन की ओर से सवाल उठाए गए। उनके वकील पुष्प शर्मा ने आरोप लगाया कि उन्होंने पुलिस अधिकारियों से कई बार अपने मुवक्किलों से मिलने की अनुमति मांगी, लेकिन उन्हें मुलाकात नहीं करने दी गई। वकील के मुताबिक, वह हिरासत में लिए गए लोगों की सुरक्षा और उनकी स्थिति के बारे में जानकारी चाहते थे।
CJP की ओर से सोशल मीडिया पर भी हिरासत को लेकर नाराजगी जाहिर की गई। संगठन के नेता अभिजीत दिपके ने इसे गंभीर मामला बताते हुए पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए और हिरासत को अपहरण जैसा करार दिया। हालांकि, पुलिस ने CJP नेताओं के खिलाफ जंतर-मंतर परिसर में कथित अनधिकृत प्रवेश और सुरक्षा घेरा तोड़ने के आरोप में मामला दर्ज किया है। पुलिस के अनुसार, मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। इस तरह एक ही घटनाक्रम को लेकर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के दावे आमने-सामने हैं।
प्रदर्शन का मुद्दा मंगलवार को छात्र संगठनों तक भी पहुंच गया। छात्र संगठन दिशा के सदस्यों ने कनॉट प्लेस से विरोध मार्च निकालकर जंतर-मंतर को आधिकारिक प्रदर्शन स्थलों की सूची में दोबारा शामिल करने और हिरासत में लिए गए CJP नेताओं की रिहाई की मांग की। वहीं, कांग्रेस के छात्र संगठन NSUI के कार्यकर्ताओं ने राजीव चौक मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर सात के बाहर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। मौके पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया।
इन घटनाओं के बीच राहुल गांधी के आवास पर हुई हाई टी बैठक ने राजनीतिक हलचल को और तेज कर दिया। बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, सोनिया गांधी, INDIA गठबंधन के विभिन्न दलों के नेताओं और अन्य प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग के कामकाज पर सवाल उठाते हुए आंदोलन को व्यापक जनभागीदारी से जोड़ने की बात कही। बैठक के बाद नेताओं के बयानों से स्पष्ट हुआ कि गठबंधन सड़क पर विरोध के साथ-साथ राजनीतिक और संसदीय स्तर पर भी अपनी रणनीति आगे बढ़ाना चाहता है।
राहुल गांधी ने बैठक के बाद कहा कि वोट चोरी के खिलाफ राजनीतिक संघर्ष और जनआंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि कथित अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय होनी चाहिए। उनके मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को इन आरोपों पर जवाब देना चाहिए। ये विपक्ष के आरोप हैं; इनकी स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित पक्षों का जवाब अलग से महत्वपूर्ण होगा।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने पिछले चार दिनों के अभियानों को सफल बताते हुए कहा कि दिल्ली में युवाओं और आम नागरिकों की बड़ी भागीदारी देखने को मिली है। उन्होंने दावा किया कि विपक्ष जनहित के मुद्दों को लेकर एकजुट है और कथित वोट चोरी के आरोपों को जनता के सामने उठाता रहेगा। आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने भी चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि संवैधानिक संस्थाओं पर दबाव डालने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए विपक्ष पीछे नहीं हटेगा।
समाजवादी पार्टी की सांसद प्रिया सरोज ने कहा कि विरोध प्रदर्शन का स्थल बदलने से विपक्ष की आवाज नहीं दबाई जा सकती। झारखंड मुक्ति मोर्चा की सांसद महुआ माजी ने प्रदर्शन के दौरान धक्का-मुक्की के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि भीड़ में आगे बढ़ने की कोशिश के कारण हल्की धक्का-मुक्की हुई हो सकती है, लेकिन उनकी ओर से कोई झड़प शुरू नहीं की गई। कांग्रेस नेता भूपेश बघेल ने प्रदर्शन को बड़ा जनसमूह जुटाने वाला कार्यक्रम बताया और आरोप लगाया कि भारी पुलिस व्यवस्था के बावजूद लोगों के उत्साह को रोका नहीं जा सका।
कांग्रेस सांसद राजीव शुक्ला ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर विपक्ष का संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने आगे की रणनीति के लिए गठबंधन की बैठक को महत्वपूर्ण बताया। सांसद गौरव गोगोई ने कहा कि अलग-अलग मुद्दों पर चल रहे विरोधों को एक व्यापक जनआंदोलन के रूप में जोड़ने की जरूरत है। उनके अनुसार, इस अभियान में राजनीतिक दलों के साथ छात्र, वकील, किसान और समाज के अन्य वर्गों की भागीदारी बढ़ाने की कोशिश की जाएगी।
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने आंदोलन के संदेश को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इसके लिए लगातार और ठोस प्रयास करने होंगे। उन्होंने यह भी कहा कि यदि मुख्य चुनाव आयुक्त पद पर बने रहते हैं, तो संसद का सत्र शुरू होने पर उनके खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा। इस संबंध में प्रस्तावित संसदीय कार्रवाई की वास्तविक स्थिति और संवैधानिक प्रक्रिया का आगे स्पष्ट होना जरूरी है।
NCP (शरदचंद्र पवार) की सांसद सुप्रिया सुले ने कहा कि INDIA गठबंधन संविधान और नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए आंदोलन जारी रखेगा। वहीं, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए SIR के समर्थन में जनता के खड़े होने का दावा किया। दूसरी ओर, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कांग्रेस पर चुनाव आयोग के साथ राजनीतिक व्यवहार करने का आरोप लगाया और पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्तों से जुड़े पुराने नियुक्ति मामलों का उल्लेख किया। इस प्रकार चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।
दिनभर के घटनाक्रम में राजनीतिक विरोध के साथ-साथ अलग-अलग संगठनों की गतिविधियां भी सामने आईं। जहां INDIA गठबंधन की बैठक में साझा रणनीति पर चर्चा हुई, वहीं भाजपा कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस मुख्यालय के बाहर कांग्रेस सांसद अंगोमचा बिमोल अकोइजाम से जुड़े आरोपों और JNU से उनकी बर्खास्तगी के मुद्दे पर प्रदर्शन किया। इस घटनाक्रम ने राजनीतिक टकराव को और व्यापक बना दिया।
फिलहाल दिल्ली में आंदोलन के तीन अहम मोर्चे दिखाई दे रहे हैं—चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर विपक्ष के सवाल, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के अधिकार को लेकर विवाद और हिरासत में लिए गए लोगों को कानूनी सहायता मिलने का मुद्दा। सुप्रीम कोर्ट में 15 अक्टूबर को प्रस्तावित सुनवाई पर भी नजर रहेगी। अब देखना होगा कि अदालत में याचिकाओं पर क्या रुख सामने आता है, पुलिस हिरासत और दर्ज मुकदमों को लेकर आगे क्या कार्रवाई होती है और INDIA गठबंधन अपने आंदोलन को किस दिशा में ले जाता है। राजनीतिक बयानबाजी के बीच लोकतांत्रिक विरोध, कानून का पालन और निष्पक्ष जांच—तीनों की कसौटी पर आने वाले दिन महत्वपूर्ण होंगे।

Editor CP pandey

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