आगरा (राष्ट्र की परम्परा)। किडनी में ट्यूमर होने पर अक्सर मरीजों को बड़े अस्पतालों और महंगे इलाज का सहारा लेना पड़ता है, लेकिन आगरा के एस.एन. मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों ने जटिल सर्जरी कर एक मरीज को नई उम्मीद दी है। यहां 40 वर्षीय मरीज की किडनी में मौजूद ट्यूमर का सफल ऑपरेशन कर पूरी किडनी निकालने के बजाय स्वस्थ हिस्से को सुरक्षित रखा गया। खास बात यह है कि मरीज को पहले बाहर इलाज कराने पर करीब छह लाख रुपये खर्च होने का अनुमान दिया गया था और दिल्ली जाने की सलाह भी मिली थी। आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहे मरीज का एस.एन. मेडिकल कॉलेज में सफल उपचार किया गया। मेडिकल कॉलेज में मरीज की लैप्रोस्कोपिक असिस्टेड पार्शियल नेफ्रेक्टॉमी तकनीक से सर्जरी की गई। इस प्रक्रिया में किडनी के ट्यूमर वाले हिस्से को निकालकर शेष स्वस्थ किडनी को बचाने का प्रयास किया जाता है। ऑपरेशन के बाद मरीज की स्थिति ठीक बताई गई है। यह सफलता सरकारी चिकित्सा संस्थानों में उपलब्ध आधुनिक उपचार सुविधाओं और विशेषज्ञ चिकित्सकों की भूमिका को भी रेखांकित करती है। एस.एन. मेडिकल कॉलेज के चिकित्सक डॉ. विजय त्यागी ने बताया कि आधुनिक सर्जिकल तकनीकों और विशेषज्ञ टीम के समन्वय से जटिल मामलों का उपचार अब आगरा में ही संभव हो रहा है। इससे मरीजों को इलाज के लिए बड़े शहरों की ओर जाने की मजबूरी कम हो सकती है। वहीं, डॉ. अभिषेक पाठक ने बताया कि किडनी में छोटी और सीमित गांठ होने पर उपयुक्त मरीजों में पूरी किडनी निकालने के बजाय केवल ट्यूमर हटाकर किडनी की कार्यक्षमता बचाई जा सकती है। पार्शियल नेफ्रेक्टॉमी का मुख्य उद्देश्य ट्यूमर वाले हिस्से को हटाते हुए स्वस्थ ऊतक और किडनी के काम करने की क्षमता को यथासंभव संरक्षित रखना है। इस जटिल सर्जरी के दौरान एनेस्थीसिया संबंधी देखभाल में डॉ. अतिहार्ष मोहन, डॉ. प्रभा और डॉ. अमिता त्यागी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। चिकित्सकों के सामूहिक प्रयास से ऑपरेशन सफलतापूर्वक पूरा किया गया। एस.एन. मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य एवं डीन डॉ. प्रशांत गुप्ता ने कहा कि संस्थान का लगातार प्रयास है कि मरीजों को आधुनिक, गुणवत्तापूर्ण और बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। इस तरह की सफलताएं मरीजों का भरोसा बढ़ाने के साथ सरकारी चिकित्सा संस्थानों में विशेषज्ञ उपचार सेवाओं के विस्तार का संकेत देती हैं। यह मामला किडनी में ट्यूमर की समस्या से जूझ रहे लोगों के लिए महत्वपूर्ण संदेश भी देता है। किडनी में गांठ का पता चलने पर घबराने के बजाय समय पर जांच कराना और विशेषज्ञ यूरोलॉजिस्ट से सलाह लेना जरूरी है। हर मरीज के लिए सर्जरी का तरीका ट्यूमर के आकार, स्थान, उसकी जटिलता और मरीज की समग्र स्वास्थ्य स्थिति के आधार पर तय किया जाता है। सभी मामलों में किडनी बचाने वाली सर्जरी संभव हो, यह जरूरी नहीं है; इसलिए उपचार का निर्णय विशेषज्ञ चिकित्सक की सलाह से ही लिया जाना चाहिए।
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