🌱 कागज़ से धरातल तक: 37 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य – क्या वाकई हकीकत बनेगा?

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 2025 में 37 करोड़ से अधिक पौधे लगाने का जो विशाल लक्ष्य रखा गया है, वह केवल एक संख्यात्मक आकड़ा भर नहीं, बल्कि पर्यावरणीय पुनरुद्धार, जलवायु संतुलन और भावी पीढ़ियों के लिए एक हरित भविष्य की बुनियाद भी है। परंतु प्रश्न यह है कि क्या यह महत्वाकांक्षी अभियान धरातल पर पूरी निष्ठा से उतर पाएगा या कहीं यह लक्ष्य भी कागजों में दर्ज आँकड़ों की खानापूर्ति बन कर रह जाएगा?

🌿 इरादा नेक, पर अमल में कितनी ईमानदारी?

उत्तर प्रदेश में वृक्षारोपण अभियान कोई नया प्रयोग नहीं है। पूर्व वर्षों में भी करोड़ों पौधे लगाने के दावे सरकार द्वारा किए गए हैं, परंतु ज़मीनी स्तर पर रोपित पौधों के जीवित रहने की दर मात्र 50-60% के आसपास ही रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या इस बार महज़ पौधे रोप देना ही सफलता मानी जाएगी, या उनकी देखरेख, संरक्षण और जीवित रहने की गारंटी भी दी जाएगी?

वास्तविकता यह है कि वृक्षारोपण सिर्फ एक दिन का उत्सव नहीं, बल्कि एक सतत प्रक्रिया है – जिसमें ग्राम पंचायतों, स्कूलों, वन विभाग, किसानों, सामाजिक संगठनों और स्थानीय जनता की समर्पित भागीदारी अनिवार्य है। जब तक यह भागीदारी जमीनी हकीकत नहीं बनती, तब तक लाखों पौधे रोप कर भी हम भविष्य को हरा-भरा नहीं बना सकते।

🏢 कागज़ी आंकड़े बनाम ज़मीनी सच्चाई

पिछले वर्षों में यह देखने को मिला है कि कई जनपदों में वृक्षारोपण महाअभियान को लेकर “रूटीन औपचारिकता” की भावना पनप गई है। तस्वीरें खिंचवाना, रिपोर्ट भेजना और सोशल मीडिया पर प्रचार कर देना ही लक्ष्य बन जाता है। पौधे रोपने के बाद न तो उन पर जल डालने की व्यवस्था होती है, न ही उनकी सुरक्षा की। नतीजतन, महीनों में अधिकांश पौधे सूख जाते हैं और जनता के पैसे, संसाधन और मेहनत बर्बाद हो जाती है।

यदि इस बार भी इसी ढर्रे पर काम हुआ, तो 37 करोड़ पौधे लगाने का सपना केवल सरकारी प्रेस विज्ञप्तियों, फोटोग्राफ्स और रिपोर्ट बुक्स तक ही सीमित रह जाएगा।

🛠 समाधान: पौधारोपण को जनांदोलन बनाए सरकार

सरकार यदि इस लक्ष्य को सत प्रतिशत सफल बनाना चाहती है, तो निम्न बिंदुओं पर गंभीरता से ध्यान देना होगा:

  1. पौधों का चयन स्थानीय पर्यावरण के अनुसार किया जाए, जिससे उनकी जीवित रहने की संभावना बढ़े।
  2. हर पौधे को “पालक” मिले – विद्यालय, ग्राम पंचायत, स्वयंसेवी संगठन या निजी व्यक्ति जो उसकी सुरक्षा का जिम्मा लें।
  3. जिलावार निगरानी कमेटी का गठन हो, जो हर तीन महीने पर रिपोर्टिंग करें।
  4. GPS ट्रैकिंग आधारित पौधारोपण ऐप से पौधों की संख्या, स्थिति और देखरेख का वास्तविक समय डेटा जुटाया जाए।
  5. पुरस्कृत और दंडित करने की व्यवस्था हो – अच्छा प्रदर्शन करने वालों को प्रोत्साहन और लापरवाह अधिकारियों को दंड।

🌍 हर पौधा एक भविष्य की गारंटी

वृक्ष केवल ऑक्सीजन ही नहीं देते, बल्कि मिट्टी की उर्वरता, वर्षा चक्र, जैव विविधता और पशु-पक्षियों का जीवन भी उनसे जुड़ा है। 37 करोड़ पौधों का यह अभियान यदि ईमानदारी से चलाया जाए, तो यह न केवल भारत के सबसे बड़े वृक्षारोपण अभियानों में गिना जाएगा, बल्कि जलवायु परिवर्तन की दिशा में भी एक सार्थक हस्तक्षेप बन सकता है।परंतु यह तभी संभव है, जब हर नागरिक यह समझे कि वह केवल सरकार का नहीं, हम सबका मिशन है – एक ऐसा मिशन जो हमारे बच्चों के भविष्य से जुड़ा है।

Editor CP pandey

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