बलरामपुर में बेटियों के घर छोड़ने के मामले बढ़े
बलरामपुर (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले में किशोरियों और युवतियों के घर से लापता होने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। पिछले करीब छह महीनों में जिले के 14 थानों में ऐसे 155 से अधिक मामले पुलिस के सामने आए हैं। करीब 183 दिनों में दर्ज मामलों के आंकड़े देखें तो औसतन हर 1.2 दिन में एक बेटी के घर छोड़ने का मामला सामने आया। कई शिकायतों में परिजनों ने युवकों पर शादी का झांसा देकर बहला-फुसलाकर ले जाने का आरोप लगाया है।
पिछले एक सप्ताह के दौरान ही नाबालिग किशोरियों समेत पांच युवतियों के घर से लापता होने की शिकायतें पुलिस तक पहुंचीं। गैसड़ी क्षेत्र में 16 वर्षीय किशोरी के लापता होने पर उसके पिता ने गांव के एक युवक पर शादी का झांसा देकर बहला-फुसलाकर ले जाने का आरोप लगाया। पुलिस ने शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
कोतवाली देहात क्षेत्र में भी 16 वर्षीय किशोरी के लापता होने के मामले में नामजद युवक के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। वहीं, ललिया और रेहरा बाजार क्षेत्र में 19-19 वर्षीय युवतियों के घर से जाने के मामले सामने आए हैं। इन शिकायतों में भी शादी का झांसा देकर बहला-फुसलाकर ले जाने का आरोप लगाया गया है।
तुलसीपुर क्षेत्र में 20 सितंबर की सुबह एक युवती और दो नाबालिग बहनें जंगल में सुरसुरवा तोड़ने की बात कहकर घर से निकली थीं। देर शाम तक तीनों वापस नहीं लौटीं। परिजनों ने घर में तलाश की तो कुछ कपड़े, गहने और रुपये भी गायब मिले। इसके बाद उन्होंने तीनों के किसी के साथ चले जाने की आशंका जताते हुए पुलिस को सूचना दी। पुलिस मामले के विभिन्न पहलुओं की जांच कर रही है।
पुलिस के पास पहुंची कई शिकायतों में युवकों पर किशोरियों और युवतियों को शादी का झांसा देकर बहला-फुसलाकर साथ ले जाने के आरोप लगाए गए हैं। कुछ शिकायतों में कथित आरोपियों की ओर से परिजनों को संदेश भेजे जाने की बात भी सामने आई है। हालांकि, किसी मामले में वास्तविक घटनाक्रम क्या रहा, यह पुलिस की जांच पूरी होने और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही स्पष्ट होगा।
नाबालिगों से जुड़े मामलों में पुलिस उनकी बरामदगी के साथ-साथ उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कानूनी कार्रवाई कर रही है। ऐसे मामलों में परिजनों से भी अपील की जा रही है कि किशोरियों के अचानक घर से बाहर जाने, मोबाइल संपर्क या अन्य असामान्य गतिविधियों की जानकारी मिलने पर तत्काल पुलिस को सूचना दें।
विशेषज्ञों के अनुसार किशोरावस्था में भावनात्मक और सामाजिक बदलाव तेजी से होते हैं। मोबाइल फोन और सोशल मीडिया ने संपर्क को आसान बनाया है, लेकिन इसके साथ अनजान लोगों के संपर्क में आने तथा भावनात्मक रूप से प्रभावित होने की आशंका भी रहती है। ऐसे में अभिभावकों के लिए जरूरी है कि वे बेटियों से संवाद बनाए रखें और उनकी पढ़ाई, मित्रता, ऑनलाइन गतिविधियों तथा व्यक्तिगत परेशानियों को समझने का प्रयास करें।
एमएलके पीजी कॉलेज के वनस्पति विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. राजीव रंजन ने कहा कि किशोरावस्था में बच्चों में भावनात्मक बदलाव तेजी से होते हैं। परिवार और शिक्षकों को बच्चों की बात ध्यान से सुननी चाहिए और उनकी समस्याओं को समझने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने किशोरियों को पढ़ाई और भविष्य के लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करने के लिए लगातार प्रेरित करने पर जोर दिया।
क्या बोले बलरामपुर एसपी?
बलरामपुर के एसपी मार्तंड प्रकाश सिंह ने बताया कि मिशन शक्ति के तहत जिले के सभी थाना क्षेत्रों में बेटियों और महिलाओं को जागरूक करने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि किशोरियों को गुमराह कर अपने साथ ले जाने वाले अराजक तत्वों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई कर रही है। पुलिस ऐसे मामलों में शिकायत मिलने पर आवश्यक कानूनी कदम उठा रही है।
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