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डीडीयू के केन्द्रीय ग्रंथालय में ‘निंबस’ पर कार्यशाला आयोजित

विद्यार्थियों को नवीनतम संसाधनों तक सुगम पहुँच हेतु आगे भी सभी प्रयास किए जाते रहेंगे : प्रो. पूनम टंडन

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के केंद्रीय पुस्तकालय द्वारा संवाद भवन में ‘निंबस’ रिमोट एक्सेस सॉफ्टवेयर पर एक दिवसीय कार्यशाला संपन्न हुई। कार्यशाला का उद्देश्य शोधकर्ताओं और छात्रों को नवीनतम शैक्षिक संसाधनों तक सुगम और सुविधाजनक पहुंच प्रदान करना था, जिससे उनके शैक्षणिक और शोध कार्यों की गुणवत्ता में वृद्धि हो सके। कार्यशाला का उद्घाटन कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलित कर किया। उद्घाटन भाषण में कुलपति ने विद्यार्थियों की शिक्षा में डिजिटल संसाधनों के महत्त्व पर प्रकाश डाला और आश्वस्त किया कि विश्वविद्यालय भविष्य में भी ऐसे प्रयास जारी रखेगा। इस अवसर पर मंच पर प्रो-वाइस-चांसलर प्रो. शांतनु रस्तोगी ने सभी प्रतिभागियों का स्वागत व धन्यवाद ज्ञापन डीन (लॉ) प्रो. अहमद नसीम द्वारा किया गया। मुख्य वक्ता के रूप में निंबस डॉट कॉम के विशेषज्ञ भुवनेश चंद्र शर्मा ने रिमोट एक्सेस सॉफ्टवेयर के विभिन्न पहलुओं और उसकी कार्यप्रणाली पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने शोधकर्ताओं और छात्रों के लिए इस सॉफ्टवेयर के उपयोग के लाभों पर जोर दिया। कार्यशाला का संचालन डॉ. सूर्यकांत त्रिपाठी द्वारा कुशलतापूर्वक किया गया। कार्यशाला का आयोजन डॉ. बिभाष कुमार मिश्रा विश्वविद्यालय पुस्तकालयाध्यक्ष) के मार्गदर्शन में हुआ, जिन्होंने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। इस आयोजन में श्री एस.एन. पांडेय, डॉ. आर.के. मिश्रा, डॉ. मनोज कुमार द्विवेदी, महेन्द्र नाथ सिंह, श्री योगेन्द्र यादव, और श्रीमती सीमा प्रयाग चौधरी सहित पुस्तकालय टीम का महत्त्वपूर्ण योगदान रहा। कार्यशाला में अधिष्ठाता कला संकाय प्रो. राजवंत राव, एलएलबी के समन्वयक प्रो. जितेंद्र मिश्रा, प्रो. सुधीर श्रीवास्तव, प्रो. गौरहरी बेहरा, प्रो. विनय कुमार सिंह, प्रो. निखिलकांत शुक्ला, प्रो. सोमशंकर दुबे, प्रो. निधि चतुर्वेदी, प्रो. पूजा सिंह प्रो. आमोद राय , डॉ. ओम प्रकाश सिंह, डाॅ. मनीष पाण्डेय, देवेंद्र पाल, डॉ. दीपेंद्र मोहन सिंह, डॉ. स्मृति मल्ल, डॉ रंजनलता सहित विभिन्न विभागों और महाविद्यालयों के शिक्षक, शोधार्थी, और बड़ी संख्या में छात्र उपस्थित रहे। कार्यशाला के समापन पर प्रतिभागियों ने इस तरह की पहल के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन और केंद्रीय पुस्तकालय की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाओं से उन्हें शोध में नवीनतम संसाधनों का लाभ उठाने का अवसर प्राप्त होगा, जिससे उनके शोध और अध्ययन की गुणवत्ता में सुधार होगा।

Karan Pandey

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