✒️नवनीत मिश्र
आज से प्रत्येक वर्ष 21 दिसंबर को विश्व ध्यान दिवस मनाया जाएगा। इसका उद्देश्य विश्व भर में शांति, एकता और मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देना है। यह दिन हमें अपने जीवन में ध्यान के महत्व को समझने और इसका अभ्यास करने के लिए प्रेरित करता है।
ध्यान एक प्राचीन अभ्यास है। जो हमें अपने मन और शरीर को शांत और एकाग्र करने में मदद करता है। यह एक तकनीक है जो हमें अपने विचारों और भावनाओं को नियंत्रित करने और अपने आंतरिक शांति और सुख को बढ़ाने में मदद करती है।
विगत दिनों संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि विश्व ध्यान दिवस पर प्रस्ताव को अपनाने में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका हमारे सभ्यतागत सिद्धांत ‘वसुधैव कुटुम्बकम‘ के अनुरूप समग्र मानव कल्याण और इस दिशा में विश्व के नेतृत्व के प्रति उसकी दृढ़ प्रतिबद्धता का प्रमाण है।’
भारत के साथ लिकटेंस्टीन, श्रीलंका, नेपाल, मैक्सिको और अंडोरा उन देशों के मुख्य समूह के सदस्य थे जिन्होंने 193 सदस्यीय संयुक्त राष्ट्र महासभा में ‘विश्व ध्यान दिवस’ शीर्षक वाले प्रस्ताव को शुक्रवार को सर्वसम्मति से पारित करने में अहम भूमिका निभाई।
विश्व ध्यान दिवस, 21 दिसंबर, शीतकालीन अयनांत या संक्रांति का दिन है। जो भारतीय परंपरा के अनुसार उत्तरायण की शुरुआत होता है। जो विशेष रूप से आंतरिक चिंतन और ध्यान के लिए वर्ष के एक शुभ समय की शुरुआत होती है।
इन पंक्तियों के लेखक कहना है कि यह अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के ठीक छह महीने बाद आता है। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 21 जून को मनाया जाता है। जब ग्रीष्म संक्रांति होती है। ज्ञात हो कि भारत ने 2014 में 21 जून को अंतरराट्रीय योग दिवस घोषित करने में अग्रणी भूमिका निभाई थी।
ध्यान दिवस पर विभिन्न संगठन और समूह ध्यान सत्र, कार्यशालाएं और अन्य कार्यक्रम आयोजित होंगे। जो लोगों को ध्यान के बारे में सीखने और इसका अभ्यास करने का अवसर प्रदान करेंगे हैं।
भारतीय वांग्मय में ध्यान के अनेक लाभ बताए गए हैं:-
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