नारी: सृजन, शक्ति और सभ्यता की आधारशिला

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर विशेष- नवनीत मिश्र

नारी शक्ति है, सम्मान है।
नारी गौरव है, अभिमान है।
नारी जननी है, संस्कृति के प्राण है।

भारतीय संस्कृति में नारी को सृष्टि की मूल शक्ति के रूप में देखा गया है। हमारे शास्त्रों में नारी को देवी स्वरूप माना गया है। “त्वं स्वाहा त्वं स्वधा त्वं हि वषट्कारः स्वरात्मिका” जैसे मंत्रों में नारी की दिव्य शक्ति का वर्णन मिलता है, जिसका अर्थ है कि नारी ही यज्ञ की आहुति है, श्रद्धा है और जीवन की ऊर्जा का मूल स्रोत है। यही कारण है कि भारतीय परंपरा में शक्ति की आराधना के रूप में दुर्गा, सरस्वती और लक्ष्मी की पूजा की जाती है।

इतिहास के पन्नों में भी नारी की असाधारण भूमिका स्पष्ट दिखाई देती है। स्वतंत्रता संग्राम में रानी लक्ष्मीबाई, सरोजिनी नायडू और कस्तूरबा गांधी जैसी महिलाओं ने अपने साहस और नेतृत्व से देश को नई प्रेरणा दी। शिक्षा और सामाजिक सुधार के क्षेत्र में सावित्रीबाई फुले ने महिला शिक्षा की नींव रखकर समाज में जागरूकता का दीप जलाया। समय के साथ महिलाओं ने हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। अंतरिक्ष विज्ञान में कल्पना चावला और सुनीता विलियम्स ने विश्व पटल पर भारत का नाम रोशन किया, तो खेल के क्षेत्र में पी.वी. सिंधु, मैरी कॉम और साक्षी मलिक जैसी खिलाड़ियों ने यह साबित किया कि दृढ़ संकल्प और मेहनत के सामने कोई बाधा टिक नहीं सकती। राजनीति, प्रशासन, साहित्य, शिक्षा और विज्ञान जैसे अनेक क्षेत्रों में महिलाओं की उपलब्धियाँ लगातार नई ऊँचाइयाँ छू रही हैं।

इन्हीं उपलब्धियों और संघर्षों को सम्मान देने के उद्देश्य से हर वर्ष 8 मार्च को विश्व भर में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है। इसकी शुरुआत 20वीं सदी के प्रारंभ में महिलाओं के अधिकारों, समान वेतन और बेहतर कार्य परिस्थितियों की मांग को लेकर हुए आंदोलनों से हुई। संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 1975 से इस दिवस को आधिकारिक रूप से मनाना शुरू किया, जिसके बाद से यह दिन महिलाओं के अधिकार, समानता और सशक्तिकरण का वैश्विक प्रतीक बन गया। आज समाज की वास्तविक प्रगति तभी संभव है जब महिलाओं को शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और समान अवसर मिलें। एक शिक्षित और सशक्त महिला केवल अपने जीवन को ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार और समाज को समृद्ध बनाती है। यही कारण है कि कहा जाता है “यदि आप एक पुरुष को शिक्षित करते हैं तो एक व्यक्ति शिक्षित होता है, लेकिन यदि एक महिला को शिक्षित करते हैं तो पूरा परिवार शिक्षित होता है।”

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस हमें यह स्मरण कराता है कि नारी केवल घर की जिम्मेदारियों तक सीमित नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र निर्माण की महत्वपूर्ण भागीदार है। जब नारी का सम्मान, सुरक्षा और सशक्तिकरण सुनिश्चित होगा, तभी एक संतुलित, प्रगतिशील और समृद्ध समाज का निर्माण संभव होगा।

rkpNavneet Mishra

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