उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की अध्यक्ष कीर्ति पांडेय का इस्तीफ़ा मंजूर

एक वर्ष में अनपेक्षित विदाई, कार्यवाहक अध्यक्ष बने राम सुचित

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (UPESSC) की पहली पूर्णकालिक अध्यक्ष प्रो. कीर्ति पांडेय ने सोमवार, 22 सितंबर 2025 को पद से इस्तीफ़ा दे दिया। राज्य सरकार ने उनके त्यागपत्र को तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया है। उन्होंने अपने पत्र में “व्यक्तिगत कारणों” का हवाला दिया, हालांकि इस्तीफ़े के पीछे के वास्तविक कारणों पर अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।

नियुक्ति और कार्यकाल

प्रो. पांडेय को 1 सितंबर 2024 को आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। आयोग का गठन वर्ष 2023 में हुआ और मार्च 2024 में 12 सदस्यों की नियुक्ति हुई थी। उनके कार्यकाल में अपेक्षित शिक्षक भर्ती प्रक्रियाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा न किया जा सकना बड़ी चुनौती रहा। टीजीटी-पीजीटी परीक्षाओं की तारीखों में बदलाव, प्रवेश-पत्र वितरण में विलंब और साक्षात्कार कार्यक्रम तय न होने से अभ्यर्थियों में असंतोष रहा।

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इस्तीफ़ा और नई व्यवस्था

इस्तीफ़े के बाद वरिष्ठ सदस्य राम सुचित को कार्यवाहक अध्यक्ष का प्रभार दिया गया है। उन्होंने कहा कि वे शासन के निर्देशानुसार आगे की कार्रवाई करेंगे। वहीं, नए स्थायी अध्यक्ष की नियुक्ति के लिए 21 अक्टूबर 2025 तक आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। पात्रता शर्तों में प्रमुख सचिव स्तर का अनुभव या विश्वविद्यालय में प्रोफेसर रहते हुए दस वर्ष का शैक्षिक व प्रशासनिक अनुभव आवश्यक है।

आलोचना और चुनौतियाँ

शिक्षक भर्ती प्रक्रियाओं में देरी और पारदर्शिता की कमी को लेकर आयोग लगातार आलोचना के घेरे में रहा। अभ्यर्थियों का कहना है कि समय पर परीक्षाएं और परिणाम न आने से भविष्य प्रभावित हुआ है। आलोचकों का मानना है कि कार्यवाहक अध्यक्ष शासन की मंज़ूरी के बिना कोई बड़ा नीतिगत निर्णय नहीं ले पाएंगे।

आगे की संभावनाएँ

शिक्षा जगत और अभ्यर्थियों की निगाहें अब नए अध्यक्ष की नियुक्ति पर टिकी हैं। लंबित भर्ती प्रक्रियाओं को पटरी पर लाना, भरोसा बहाल करना और पारदर्शिता सुनिश्चित करना नए नेतृत्व के सामने सबसे बड़ी चुनौती होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आयोग सक्रिय और जवाबदेह कार्यप्रणाली अपनाता है, तो इस संस्थान की साख फिर से मजबूत हो सकती है।

Editor CP pandey

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