यूपी सरकार बिहार की तर्ज पर जाति आधारित गणना कराए बहाना न बनाए-रिहाई मंच

आजमगढ़ ( राष्ट्र की परम्परा )
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जाति जनगणना कराने के सवाल पर विधानसभा में भाजपा मंत्री सूर्य प्रताप शाही के जवाब और महेंद्रनाथ पाण्डेय के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए, रिहाई मंच महासचिव राजीव यादव ने कहा कि कोई भी राज्य सरकार जाति आधारित सर्वे करवा सकता है, बिहार इसका ठोस उदाहरण है। जातिवार जनगणना केंद्र के क्षेत्राधिकार में है यह कहकर भाजपा भाग रही है।
जाति आधारित विषमता के खात्मे के लिए जरूरी है कि जातियों से जुड़े ठोस सामाजिक-आर्थिक तथ्य व आंकड़े उपलब्ध हों, जिससे विषमता को खत्म करने के लिए सरकार नीतियां बना पाए। जाति विषमता को खत्म किए बगैर जाति उन्मूलन नहीं हो सकता। सच्चाई है कि भाजपा सामाजिक न्याय विरोधी है, पिछड़ों-अतिपिछड़ों की दुश्मन है और उसका हक-हिस्सा नहीं देना चाहती है। जबकि 2019 से पहले केन्द्र के एक कैबिनेट मिनिस्टर ने ओबीसी की जाति जनगणना की बात कही थी।
जाति आधारित विषमता पर परदा डालने और सामाजिक न्याय के मुद्दों को दबाने के लिए ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गरीब, युवा, महिला, किसान को सबसे बड़ी जाति कह रहे हैं,वे जाति के यथार्थ को दबा नहीं सकते और न ही सामाजिक न्याय की लड़ाई को भटका सकते हैं।
राजीव यादव ने विधानसभा में जाति जनगणना के सवाल पर भाजपा मंत्री सूर्य प्रताप शाही के जवाब पर पूछा कि बाबा साहेब अंबेडकर जिस समतामूलक समाज की स्थापना करना चाहते थे या पिछड़ा पावै सौ में साठ का नारा देने वाले डॉ. राम मनोहर लोहिया के सपनों का भारत बिना जाति जनगणना के कैसे बनेगा। सच्चाई यह है कि आरक्षण न होता तो वंचित समाज नौकरियों और शिक्षा में न के बराबर होता। योगी सरकार में लगातार नियुक्तियों में ओबीसी, एससी, एसटी के आरक्षण को सही ढंग से लागू नहीं किया जा रहा है। 69000 शिक्षक भर्ती में आरक्षण का कैसे घोटाला हो गया, लंबे समय से वे आंदोलन कर रहे हैं और आज भी लखनऊ के इको गार्डन में धरनारत हैं। जिनपर यूपी पुलिस गालियां और लाठियां बरसा रही है।
भाजपा ने आर्थिक आधार को बहाना बनाकर सवर्ण समाज को गैर संवैधानिक तरीके से आरक्षण दिया है। लेकिन, पिछड़ों को हक-हिस्सा देने से इंकार कर रही है, इसलिए राज्य से केन्द्र तक जाति से जुड़े तथ्य व आंकड़ों को सामने लाने से भाग रही है। जातिगत जनगणना के सवाल पर भाजपा के मंत्री केंद्र का हवाला देकर भाग रहे हैं, ऐसा नहीं है तो वे केन्द्र सरकार से सामाजिक आर्थिक और जातिगत जनगणना 2011 (SECC) के तहत 2016 में जो आंकड़े आए उन्हें क्यों नहीं सार्वजनिक करने के लिए कह रहे हैं या फिर यूपी विधानसभा से जाति जनगणना कराने को लेकर प्रस्ताव पारित कर केन्द्र सरकार को क्यों नहीं भेज रहे।

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